राजधानी में सर्दियों के साथ वायु प्रदूषण एक बार फिर जानलेवा स्तर पर पहुंच गया है। कोहरे और स्मॉग के मेल से हवा जहरीली हो गई है। प्रदूषित हवा का सीधा असर लोगों की आंखों और फेफड़ों पर पड़ रहा है। हवा में मौजूद धूल, रसायन और खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) आँखों की प्राकृतिक नमी को कम कर रहे हैं, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस, जलन, चुभन, भारीपन और आंखों में रेत जैसा एहसास बढ़ रहा है।
राजधानी में कोहरे और स्मॉग के गठजोड़ से हवा हुई और जहरीली
राजधानी में गिरते तापमान के बीच कोहरा और स्मॉग के गठजोड़ के बीच हवा बेहद जहरीली बनी हुई है। कई इलाकों में कम दृश्यता के बीच लोगों को आंख में जलन, सांस के मरीजों को परेशानी हुई। बृहस्पतिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 373 दर्ज किया गया जो हवा की बेहद खराब श्रेणी है। नोएडा की हवा 397 एक्यूआई के साथ सबसे अधिक प्रदूषित रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि शनिवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रहेगी।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 17.48 फीसदी रहा। पेरिफेरल उद्योग से 8.77, आवासीय इलाकों से 4.27 और निर्माण गतिविधियों से 2.41 फीसदी की भागीदारी रही। सीपीसीबी के अनुसार, बृहस्पतिवार को हवा उत्तर पश्चिम दिशा से 8 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1000 मीटर रही। वेंटिलेशन इंडेक्स 6000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा।
दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 303 और पीएम2.5 की मात्रा 181.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। ग्रेटर नोएडा में 344, गाजियाबाद में 339 और गुरुग्राम में 276 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 239 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है।