स्थानीय निवासी भले इस इमारत के खतरनाक होने की शिकायत एमसीडी को देने की बात कह रहे हैं, लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। एमसीडी प्रवक्ता का कहना है कि उन्हें कभी बिल्डिंग के खतरनाक होने की न तो शिकायत मिली, न ही उसने बिल्डिंग को खतरनाक घोषित किया था।
एमसीडी प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि बिल्डिंग के गिरने की जानकारी सुबह कंट्रोल रूम को मिली। बचाव व राहत कार्य के साथ-साथ मलबा हटाने के लिए मशीनों के साथ एक टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। केशवपुरम क्षेत्र के उपायुक्त भी घटनास्थल पर पहुंचे। प्रवक्ता के मुताबिक, इमारत का ढांचा 20-25 साल पुराना था और काफी कमजोर व खस्ताहाल था।
घटनास्थल पर निर्माण की गतिविधि या निर्माण सामग्री नहीं मिली। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अन्य विभागों से मिलकर बचाव अभियान चलाया। प्रवक्ता के अनुसार, निगम ने इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया था, न ही केशवपुरम भवन विभाग में इसे खतरनाक इमारत घोषित करने हेतु कोई आवेदन मिला। केशवपुरम जोन का गठन 1 सितंबर 2017 को हुआ था। दूसरी तरफ, स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत की गई थी और 20 दिन पहले अधिकारियों ने इसका निरीक्षण किया था।