सावन पार्क में जमींदोज हुई बिल्डिंग कुछ घंटे पहले गिरती तो हादसे की चपेट में कहीं ज्यादा लोग आते। बिल्डिंग में चार परिवारों के कुल 23 लोग रहते थे। हादसे के समय 13 लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, या तो स्कूल चले गए थे या अपने-अपने किसी काम से निकले थे। उनका कहना है कि वे खुशकिस्मत रहे कि बच गए। राज बहादुर की पत्नी से मिलने आए उसके दो रिश्तेदार कमला शंकर और विजय चंद मिनट पहले ही घर पहुंचे थे। दोनों हादसे में बुरी तरह जख्मी हुए हैं।
हादसे के शिकार लोगों के परिजनों ने बताया कि उमेश के परिवार में सात लोग थे। उमेश सुबह किसी काम से निकल गया था। उसकी सात साल की बेटी रिशिका भी किसी पड़ोसी के यहां गई थी। परिवार के बाकी सदस्य हादसे का शिकार हो गए। हादसे में उमेश की पत्नी सीमा, भाई लक्ष्मण और दो बच्चे आशी और शौर्य की मौत हुई है। इधर राज बहादुर की 15 वर्षीय बड़ी बेटी कोठी में काम के लिए निकली थी। इसके बाकी तीन बच्चे शिवम (10), मोहिनी (7) और शिवाजी (5) स्कूल गए थे।
राजमिस्त्री विमलेश, उसकी पत्नी विमला देवी और दो बेटियां रिंकी (19) और शिल्पी (17 ) अपने-अपने काम पर निकले थे। हादसे में विमलेश के दो बच्चे सुमनेश व रजनीश की भी मौत हो गई। दूसरी ओर, चालक की नौकरी करने वाला नरोत्तम भी किसी काम से बाहर निकला था। उसके दो बच्चे रिशा (13) और नितेश (17) अपने-अपने स्कूल गए थे। हादसे के बाद विमलेश ने कहा कि वह मकान को खाली करना चाहता था, लेकिन बिल्डर धर्मेंद्र ने उसे मकान खाली नहीं करने दिया। धर्मेंद्र का कहना था कि वह जल्द ही उसे मकान दिला देगा। एक अन्य शख्स ने बताया कि पहली मंजिल पर कुछ माह पूर्व तक किराएदार रहता था, लेकिन बिल्डिंग की हालत देखकर वह मकान छोड़कर चला गया था।