डॉक्टर से मारपीट के विरोध में सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से मरीजों की जान पर बन आई है। अस्पताल परिसर में सोमवार को मरीज इलाज नहीं मिलने के कारण पीड़ा से कराहते रहे, वहीं पांच मरीजों ने दम तोड़ दिया। इसके बावजूद डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा और वे हड़ताल पर अटे हैं। मृतकों के परिजनों ने समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
डॉक्टर न मिलने की वजह से किसी का बेटा इस दुनिया से चला गया तो किसी का भाई। मृतकों में ज्यादातर गंभीर मरीज थे, जो हड़ताल से पहले दो दिन के दौरान ही भर्ती हुए थे। मरीजों और उनके तीमारदारों को इधर-उधर भटकते देख अस्पताल प्रबंधन भी उन्हें उपचार दिलाने में नाकाम साबित हुआ।
मृतकों में बिहार निवासी किशन मुरारी (19), यूपी के बदायूं जिला निवासी राजू (14), दिल्ली के कोटला मुबारकपुर निवासी प्रिंस (8) व दिल्ली की 20 वर्षीय युवती के अलावा गुरुग्राम से रेफर एसिड पीड़ित एक मरीज शामिल है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सीनियर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे थे। हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों की मौत होना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उनकी वजह से किसी की जान नहीं गई है।
दवा के लिए भटकते रहे मरीज, 150 से अधिक ऑपरेशन टाले
सफदरजंग अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार को भी जारी रहने से मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी से जूझना पड़ा। मरीजों को न दवा मिल पाई और न ही भर्ती हो पाए। अस्पताल की गैलरियों और परिसर में जहां-तहां मरीज कराह रहे थे। लेकिन उनकी बेबसी पर किसी को तरस नहीं आया। अस्पताल प्रबंधन का दावा था कि सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मरीजों को राहत नहीं मिली। प्रबंधन ने 150 से अधिक ऑपरेशन टाल दिए।
बिहार के आरा जिला निवासी महेश ने बताया कि वह अपने बड़े भाई रतनेश को लेकर पिछले छह माह से सफदरजंग अस्पताल में चक्कर लगा रहे हैं। उनके भाई की दोनों किडनी खराब है, सोमवार को भी अपने भाई को लेकर आए थे, लेकिन हड़ताल का हवाला देकर गार्डों ने वापस जाने को कहा, वहीं ओपीडी बंद होने के कारण हजारों की तादाद में मरीजों को वापस लौटना पड़ा। जो मरीज दिल्ली से बाहर से आए थे, वे हड़ताल खत्म होने की उम्मीद में शाम तक अस्पताल में बैठे रहे। उधर हड़ताल की वजह से अस्पताल में करीब 150 से ज्यादा ऑपरेशन टालने पड़े।
सड़क हादसे में घायल ने तोड़ा दम
बिहार निवासी किशन मुरारी(19) को शनिवार रात गुरुग्राम में सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण फदरजंग अस्पताल रेफर किया था। परिजनों के अनुसार वह इमरजेंसी में भर्ती था। हड़ताल की वजह से इलाज नहीं हो सका। उन्होंने दूसरे अस्पताल में रेफर करने को कहा, लेकिन नहीं किया गया। आखिरकार उसकी मौत हो गई।
यूपी के बच्चे की हुई मौत
यूपी के बदायूं जिला निवासी राजू (14) छत से गिरने की वजह से घायल अवस्था में सफदरजंग अस्पताल भर्ती हुआ था। उसे हड़ताल से एक दिन पहले यहां लाया गया था, लेकिन सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने मौत के पीछे डॉक्टरों की हड़ताल को जिम्मेदार ठहराया।
8 साल के प्रिंस ने भी तोड़ा दम
दिल्ली के कोटला मुबारकपुर निवासी राहुल का आरोप है कि उसके भतीजे प्रिंस (8) की मौत भी डॉक्टरों के हड़ताल पर होने की वजह से हुई। वे इलाज के लिए दुहाई मांगते रहे, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। बच्चे को छह दिन पहले इमरजेंसी के पांचवें तल पर भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने उन्हें इमरजेंसी वार्ड से भी बाहर निकाल दिया था। इतना ही नहीं परिजनों का यहां तक कहना है कि मौत के बाद प्रिंस का शव लेने के लिए भी उन्हें अंदर घुसने नहीं दिया जा रहा था।
एसिड पीड़ित बेटे को खो बैठा परिवार
गुरुग्राम के एक अस्पताल से शनिवार रात सफदरजंग अस्पताल में रेफर हुए एसिड पीड़ित बेटे को उसका परिवार खो बैठा। परिजनों की मानें तो रविवार सुबह डाक्टरों के हड़ताल पर जाने से उनके मरीज को उपचार नहीं मिला। सीनियर डॉक्टर तक वहां नहीं थे। अस्पताल में कोई सुनने वाला नहीं था। मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर कराने की मांग की थी, लेकिन किसी ने नहीं सुना। इसी दौरान दिल्ली के ही एक परिवार ने 20 वर्षीय बेटी को खो दिया।
मरीजों की मौत होना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इमरजेंसी वार्ड में सीनियर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। एक दिन पहले अस्पताल में डॉक्टर पर हमला होना भी गलत है। अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा बढ़ाना बेहद जरूरी है। तभी डॉक्टर बेखौफ होकर उपचार कर सकते हैं। - डॉ. प्रकाश ठाकुर, अध्यक्ष, रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन