मोती नगर इलाके में स्थित डीएलएफ कैपिटल ग्रीन सोसाइटी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आए एक और मजदूर नांगलोई निवासी विशाल की मौत हो गई। इससे घटना में मरने वालों की संख्या पांच हो गई है। इस मामले में रखरखाव संभालने वाली जेएलएल कंपनी के सुपरवाइजर अजय चौधरी को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जिला अन्वेषण इकाई कर रही है।
वहीं इस मामले में श्रम मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि, मोती नगर इलाके में स्थित डीएलएफ कैपिटल ग्रीन सोसाइटी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के टैंक की सफाई के दौरान 5 मजदूरों की मौत की जांच तीन दिन में पूरी कर रिपोर्ट श्रम विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
पुलिस के अनुसार, राममनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान विशाल ने सोमवार तड़के दम तोड़ दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामलेे में कई एजेंसियों की लापरवाही सामने आई है। इनकी भूमिका की जांच चल रही है। सोमवार दोपहर सभी मजदूरों के पोस्टमार्टम से पहले दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के फोरेंसिक विभाग के विशेषज्ञों के दल ने घटनास्थल पर जाकर छानबीन की। जांच के बाद आशंका जताई गई है कि मजदूरों की मौत जहरीली गैस की चपेट में आने से हुई है। विशेषज्ञों के अस्पताल पहुंचने के बाद दोपहर 12 बजे पोस्टमार्टम शुरू किया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई।
उधर, जांच में पता चला है कि मजदूरों के पास जहरीली गैस से बचाव का कोई उपकरण नहीं था। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि प्लांट की देखरेख का काम कई एजेंसियों से कराया जा रहा था। उनके मुताबिक, एक एजेंसी ठेका मिलने के बाद यह काम दूसरी एजेंसियों को दे देती थी। जांच की जिम्मेदारी मोती नगर थाने के बजाय जिला अन्वेषण इकाई को दी गई है।