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दिल्ली दंगा: पांच गैर इरादतन हत्या के दोषी करार, भीड़ ने बेहरहमी से मोहसिन की मार डाला था

Tue, 03 Dec 2024 05:37 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने अपने समक्ष मौजूद साक्ष्यों पर गौर किया। कहा कि यह स्थापित हो चुका है कि घातक हथियारों से लैस दंगाई भीड़ ने 25 फरवरी 2020 को चांद बाग इलाके में पीर बाबा मजार के पास मोहसिन की हत्या कर दी थी।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे के एक मामले में पांच लोगों को गैर इरादतन हत्या और गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने के आरोप में दोषी ठहराया है। हालांकि, अदालत ने दो लोगों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। मामला भीड़ में एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला दयालपुर थाने द्वारा सात आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे। दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे अदालत में पेश हुए।

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अदालत ने अपने समक्ष मौजूद साक्ष्यों पर गौर किया। कहा कि यह स्थापित हो चुका है कि घातक हथियारों से लैस दंगाई भीड़ ने 25 फरवरी 2020 को चांद बाग इलाके में पीर बाबा मजार के पास मोहसिन की हत्या कर दी थी। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले में मुख्य विवाद इस प्रश्न के इर्द-गिर्द घूमता है कि क्या आरोपी व्यक्ति उन दंगाइयों में शामिल थे। जिन्होंने पीड़ित मोहसिन पर बेरहमी से हमला करके उसकी हत्या कर दी थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के चार गवाहों की गवाही से कोई संदेह नहीं रह गया है कि पांच आरोपी अरुण, अमन कश्यप, आशीष, प्रदीप राय और देवेंद्र कुमार दंगाई भीड़ का हिस्सा थे।

जिन्होंने पीड़ित पर हमला किया था। अदालत ने कहा कि लेकिन यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था कि इन पांचों आरोपियों ने मोहसिन पर हमला किया था। उन्होंने कहा कि मोहसिन की मौत के लिए उनका आपराधिक दायित्व भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 149 (गैरकानूनी सभा) पर आधारित होना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा, पीड़ित के सिर पर चोट पहुंचाने के लिए इन पांचों आरोपी में से किसी की भी कोई विशिष्ट भूमिका न होने के कारण अदालत का मानना है कि उनका दायित्व गैर इरादतन हत्या तक ही सीमित होना चाहिए। मामले में अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी।

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