याचिका में समाचार पत्र में पहले पन्ने पर छपी खबर का हवाला देते हुए कहा गया है कि भुवनेश्वर के खांडागिरी हिल पर स्थित एक गेस्ट हाउस में स्कूली छात्राओं को ले जाकर यौन शोषण किया जाता है।
इन लड़कियों की मोबाइल से वीडियो बनाए जाते हैं, ताकि आगे भी धमकाकर शोषण किया जा सके। याची ने जांच का दावा करते हुए कहा कि इन लड़कियों व उनके परिजनों को धमकाया गया था।
इसके बाद उसने 11 अप्रैल 2015 को खांडागिरी पुलिस को शिकायत दी, जिसे लेने से मना कर दिया गया। इसके बाद याची ने 20 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत पर आयोग ने करीब एक माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद याची को आयोग की वेबसाइट से जानकारी मिली कि उसकी शिकायत पर दोबारा संज्ञान लेकर ओडिशा राज्य आयोग को जांच सौंप दी गई है, जबकि आयोग ऐसा नहीं कर सकता था।
याची का कहना है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की अगुवाई में सीबीआई की एसआईटी से इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए, क्योंकि इसमें वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हैं। इस मामले में केंद्र सरकार व महिलाओं और बच्चों के लिए काम करने वाले आयोग को भी पार्टी बनाया जाए।