30 वर्षीय राहुल को दोनों किडनी खराब हो गई थी। 2 सालों से डायलेसिस के सहारे जिंदगी चल रही थी ।ब्रेन डेड होने पर पूर्व सैन्यकर्मी की बदौलत उसको नई जिंदगी मिल पाई है। वहीं 67 वर्षीय हरमिंदर सिंह अरोड़ा को लिवर मिल पाया है।
अब दोनों ही पहले की तरह जिंदगी जी रहे हैं। अब तक शहर के अस्पताल में ब्रेन डेड हुए मरीजों के परिजनों की समझदारी के चलते एक दर्जन से ज्यादा परिवारों में खुशी आ सकी है। हालांकि ये साहस का कदम उठाने वाले परिवारों की संख्या कम है।
आंकड़ों पर नजर डाले तो 2013 से लेकर अब तक 5 ब्रेन डेड मरीजों के परिवार वालों ने ही मृतक ने ही अंगों को दान किया है। सिर में चोट लगने या स्ट्रोक की वजह से मौत होने वाले 30 प्रतिशत मरीजों के मामले ब्रेन डेथ के होते हैं।
27 नवंबर को राष्ट्री अंगदान दिवस है। इसको लेकर फोर्टिस अस्पताल में प्रेस वार्ता हुई। नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ मनोज के सिंघल ने इस बारे में बताया कि पिछले कुछ सालों में किडनी के मरीजों का आंकड़ा बढ़ गया है।
इसमें से अधिकांश मरीज डायलेसिस पर है और किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उनको डोनर नहीं मिल पा रहा है। अधिकांश ट्रांसप्लांट के केसों में 99 प्रतिशत परिवार के ही अंग देते हैं, केवल 10 प्रतिशत ही ब्रेन डेड मरीज से अंग मिल पाते हैं। जबकि ये आंकड़ा उलटा होना चाहिए।
यूरोलॉजी एंव किडनी ट्रांसप्लांट के अतिरिक्त निदेशक डॉ दुष्यंत नाडर ने कहा कि मधुमेह किडनी फेल्योर की बड़ी वजह है। भारत में सबसे ज्यादा अंग प्रत्यारोपण किडनी का ही होता है। इसको लेकर लोगों में जागरूकता की जरूरत है।
अगर अस्पताल में कोई ब्रेन डेड मरीज होता है तो परिवार वालों से अंगदान की अनुमति मिलने पर तुरंत नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन को जानकारी दी जाती है। वहां के निर्देश मिलने पर विभिन्न अस्पतालों में अंग दिए जाते हैं। फिर मरीज में अंग ट्रांसप्लांट किए जाते हैं।
शरीर से किडनी निकालने के बाद 48 से 72 घंटे तक रखा जा सकता है। लेकिन जितनी जल्दी अंग ट्रांसप्लाँट कर दिया जाए बेहतर है। वहीं लिवर 2 से 4 घंटे और हार्ट 4 से 6 घंटे तक रखा जा सकता है।
लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के निदेशक डॉ विवेक विज ने कहा कि अंग दान प्राप्त करने वाले के लिए प्रत्यारोपण दूसरे जीवन की तरह होता है। हर साल करीब 200, 000 लोगों की मौत लिवर की बीमारियों की वजह से होती है। अंगदान के जरिए इनकी जान बचाई जा सकती है।