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5 ब्रेन डेड मरीजों ने बचाई एक दर्जन से ज्यादा जिंदगी

Sat, 26 Nov 2016 07:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा

सार

2103 से अब तक 5 ब्रेन डेड मरीजों के परिवार ने मृतक के अंग किए दान
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- फोटो : brain dead
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विस्तार
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30 वर्षीय राहुल को दोनों किडनी खराब हो गई थी। 2 सालों से डायलेसिस के सहारे जिंदगी चल रही थी ।ब्रेन डेड होने पर पूर्व सैन्यकर्मी की बदौलत उसको नई जिंदगी मिल पाई है। वहीं 67 वर्षीय हरमिंदर सिंह अरोड़ा को लिवर मिल पाया है।
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अब दोनों ही पहले की तरह जिंदगी जी रहे हैं। अब तक शहर के अस्पताल में ब्रेन डेड हुए मरीजों के परिजनों की समझदारी के चलते एक दर्जन से ज्यादा परिवारों में खुशी आ सकी है।  हालांकि ये साहस का कदम उठाने वाले परिवारों की संख्या कम है।

आंकड़ों पर नजर डाले तो 2013 से लेकर अब तक 5 ब्रेन डेड मरीजों के परिवार वालों ने ही मृतक ने ही अंगों को दान किया है। सिर में चोट लगने या स्ट्रोक की वजह से मौत होने वाले 30 प्रतिशत मरीजों के मामले ब्रेन डेथ के होते हैं।
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27 नवंबर को राष्ट्री अंगदान दिवस है। इसको लेकर फोर्टिस अस्पताल में प्रेस वार्ता हुई। नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट के निदेशक डॉ मनोज के सिंघल ने इस बारे में बताया कि  पिछले कुछ सालों में किडनी के मरीजों का आंकड़ा बढ़ गया है।

इसमें से अधिकांश मरीज डायलेसिस पर है और किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उनको डोनर नहीं मिल पा रहा है। अधिकांश ट्रांसप्लांट के केसों में 99 प्रतिशत परिवार के ही अंग देते हैं, केवल 10 प्रतिशत ही ब्रेन डेड मरीज से अंग मिल पाते हैं। जबकि ये आंकड़ा उलटा होना चाहिए।

यूरोलॉजी एंव किडनी ट्रांसप्लांट के अतिरिक्त निदेशक डॉ दुष्यंत नाडर ने कहा कि मधुमेह किडनी फेल्योर की बड़ी वजह है। भारत में सबसे ज्यादा अंग प्रत्यारोपण किडनी का ही होता है। इसको लेकर लोगों में जागरूकता की जरूरत है।

अगर अस्पताल में कोई ब्रेन डेड मरीज होता है तो परिवार वालों से अंगदान की अनुमति मिलने पर तुरंत नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन को जानकारी दी जाती है। वहां के निर्देश मिलने पर विभिन्न अस्पतालों में अंग दिए जाते हैं। फिर मरीज में अंग ट्रांसप्लांट किए जाते हैं।

शरीर से किडनी निकालने के बाद 48 से 72 घंटे तक रखा जा सकता है। लेकिन जितनी जल्दी अंग ट्रांसप्लाँट कर दिया जाए बेहतर है। वहीं लिवर 2 से 4 घंटे और हार्ट 4 से 6 घंटे तक रखा जा सकता है।

लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के निदेशक डॉ विवेक विज ने कहा कि अंग दान प्राप्त करने वाले के लिए प्रत्यारोपण दूसरे जीवन की तरह होता है। हर साल करीब 200, 000 लोगों की मौत लिवर की बीमारियों की वजह से होती है। अंगदान के जरिए इनकी जान बचाई जा सकती है।
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रिश्तेदारों के डर की वजह से नहीं करते अंगदान

- फोटो : brain dead
डॉक्टरों ने बताया कि कई परिवार ब्रेन डेड होने पर भी मृतक के अंग दान करने को तैयार नहीं होते हैं। कर कर भी देते हैं तो किसी को बताने से मना करते हैं। यहां तक की रिश्तेदारों तक के सामने ये बात नहीं आने देना चाहते हैं। लोगों के अंदर मिथ बना हुआ है कि अंगदान करने से अगले जन्म में शरीर में अंग नहीं होगा।

आरडब्ल्यूए और स्कूल में चलाएंगे अभियान
फोर्टिस अस्पताल के जोनल डायरेक्टर गगन सहगल ने बताया कि अंगदान केप्रति लोगाें को जागरुक करेंगे। इसके लिए इस सप्ताह स्कूल, कॉलेज और शहर की आरडब्ल्यूए में जाकर अंगदान के बारे में बताएंगे। हमारा उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से साथ जुड़ें।

क्या होता है ब्रेन डेड 
इसमें मरीज का ब्रेन छतिग्रस्त हो जाता है। बाकि अंग उसके काम कर रहे होते हैं। उसके ठीक होने की संभावना शुन्य के बाराबर होती है। ऐसी स्थिति में परिवार अंग दान कर सकता है। जबकि शहर के अस्पतालों में  ही हर साल 300 से ज्यादा और किडनी 80 से 85 केस होते हैं। इन मरीजों में सिर्फ 10 प्रतिशत मामले होते हैं, जिन्हें ब्रेन डेड मरीजों से अंग मिलते हैं।
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