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Gurugram: बैंक खाते मुहैया कराने वाले पूर्व बैंक मैनेजर सहित पांच गिरफ्तार, मुनाफे का लालच देकर करते थे ठगी

Wed, 04 Jun 2025 08:14 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, गुरुग्राम

सार

साइबर अपराध थाना पश्चिम की पुलिस ने फर्जी सेबी दस्तावेजों से ठगी करने वाले गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें पूर्व बैंक मैनेजर भी शामिल है। आरोपियों से मोबाइल, लैपटॉप, करंट बैंक खाते और ठगी की राशि 4.40 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।
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Crime demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साइबर अपराध थाना पश्चिम की पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाते मुहैया कराने में शामिल पूर्व बैंक मैनेजर सहित पांच आरोपी पकड़े हैं। आरोपी सेबी रजिस्टर्ड कंपनी होने के फर्जी दस्तावेज भेजकर लोगों से एप इंस्टॉल कराते थे और स्टॉक मार्केट में निवेश करके अच्छा मुनाफा कमाने का लालच देकर ठगी करते थे। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश करके जेल भेजा दिया है। साइबर ठगी में संलिप्त 34 बैंक कर्मचारियों को गुरुग्राम पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि इस मामले में पुलिस 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी, साइबर अपराध) प्रियांशु दीवान ने बताया कि साइबर अपराध थाना पश्चिम की पुलिस ने पांच आरोपियों को पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान आंध्रप्रदेश के गुंटूर निवासी चिंता मनोज कुमार, हरियाणा के जींद निवासी गुरविंद्र व रवि, हिसार निवासी रोहित कुमार और हिमाचल प्रदेश के ऊना निवासी अक्षय के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों से सात मोबाइल, दो लैपटॉप और दो बैंक खातों की किट (करंट बैंक खाते जिनकी पांच करोड़ रुपये प्रतिदिन की लिमिट) बरामद की है।

पुलिस ने पांचों आरोपियों को बीते सोमवार को अदालत में पेश किया था, जहां से आरोपी चिंता मनोज व आरोपी अक्षय को दो दिन के रिमांड पर लिया गया। आरोपी गुरविन्द्र, रवि व रोहित को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दो दिन का रिमांड पूरा होने के बाद आरोपी चिंता मनोज व आरोपी अक्षय को जेल भेज दिया है।
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आरोपी ने बैंक मैनेजर पद से छोड़ी थी नौकरी
पूछताछ में पता चला कि आरोपी चिंता मनोज पहले एचडीएफसी बैंक में मैनेजर के पद पर नौकरी करता था। वर्ष 2024 में उसने टारगेट पूरा करने का दबाव होने के कारण नौकरी छोड़ दी थी। मामले में ठगी की गई राशि में से 4.40 लाख रुपये एक करंट बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। यह करंट बैंक खाता आरोपी चिंता मनोज ने अपने एक साथी आरोपी विकास (पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है) से 80 हजार रुपये में खरीदा था। 

विकास ने यही बैंक खाता 40 हजार रुपये में बैंक खाता धारक से खरीदा 
विकास ने यही बैंक खाता 40 हजार रुपये में बैंक खाता धारक से खरीदा था। आरोपी चिंता मनोज ने उक्त बैंक खाते को रोहित को बैंक खाते में आने वाली राशि के तीन फीसदी कमीशन पर दिया था। आरोपी रोहित ने आरोपी रवि व गुरविंद्र के माध्यम से इस बैंक खाते को आरोपी अक्षय उपरोक्त को कमीशन पर दिया था, जिसके बदले ये अक्षय से कमीशन प्राप्त करते थे। आरोपी अक्षय व्हाट्सएप व टेलीग्राम इत्यादि एप के माध्यम से साइबर ठगों से जुड़ा हुआ था और अक्षय ने ही उक्त बैंक खातों को साइबर ठगों तक पहुंचाया था। इसका प्रयोग करके साइबर ठगों ने वारदात को अंजाम दिया था। 

क्या है मामला?
18 मार्च को एक व्यक्ति ने साइबर अपराध थाना पश्चिम में दी शिकायत में बताया कि 13 जनवरी को उसके मोबाइल के व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से मैसेज आया था। मैसेज में एक लिंक दिया हुआ था। वहीं, शिकायतकर्ता को विश्वास में लेने के लिए उन्होंने कंफर्मेशन मेल, सेबी से रजिस्टर्ड कंपनी के दस्तावेज भेजे। फिर व्हाट्सएप पर बात करते हुए एक मोबाइल एप इंस्टॉल करा लिया और उसके माध्यम से इसको निवेश करके मुनाफा कमाने का लालच देते हुए विभिन्न ट्रांजेक्शन करवाकर ठगी की थी।

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