मध्य जिला पुलिस ने देशभर में हजारों लोगों को डिजीटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान लोकेश गुप्ता, मनोज कुमार चौधरी, मोहित जैन उर्फ रिंकू, केशव कुमार और सैफ अली के रूप में हुई है।आरोपी फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम से करंट बैंक अकाउंट खोलते थे। इन बैंक खातों में ठगी की रकम को ठिकाने लगाया जाता था। बदले में इनको मोटा कमिशन मिलता था। शुरुआती जांच के बाद पता चला है कि एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों में 473 इनके गिरोह से लिंक हुई है। इनमें 24 शिकायतें दिल्ली की शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 14 मोबाइल फोन, 40 चेकबुक, 33 सिमकार्ड, 15 कंपनी की स्टैंप, 19 डेबिट कार्ड, 14 पैन कार्ड, एक एमजी हैक्टर कार व अन्य सामान बरामद किया है। इनका गिरोह नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का अधिकारी बनकर भोले-भाले लोगों को डराकर डिजीटल अरेस्ट कर लेता था। बाद में मोटी रकम वसूल कर ली जाती थी।
ऐसे हुआ हुआ साइबर ठगी का खुलासा
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त निधिन वल्सन ने बताया कि एक महिला ने ठगी की शिकायत साइबर थाना पुलिस को दी थी। पीड़िता ने बताया कि कुछ लोगों ने उसे डिजीटल अरेस्ट 20 लाख से अधिक की ठगी कर ली है। पीड़िता ने बताया कि उसके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का पुलिस उपायुक्त बताया।
आरोपी ने बताया कि उनके आधार कार्ड को नशे का धंधा करने वालों ने इस्तेमाल किया है। इस वजह से उनको कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता को स्काइप-आईडी के जरिए एक वीडियो कॉल करवाई। उसमें आरोपियों ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की फर्जी आईडी भी दिखाई।बाद में जांच के नाम पर पीड़ित के बैंक खाते की पूरी डिटेल, ओटीपी तक ले लिया गया। महिला के खाते में करीब 89 हजार रुपये मौजूद थे। उसको भी ट्रांसफर कर लिया गया। पीड़िता के पास जब देने के लिए पैसे नहीं थे तो आरोपियों ने उसके बैंक खाते से ऑन लाइन 20 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेकर अपने खातों में ट्रांसफर कर दिया।
ऐसे पकड़े गए सभी पांच आरोपी
साइबर थाने में मामला दर्ज करने के बाद इंस्पेक्टर संदीप पंवार व अन्यों की टीम ने पड़ताल शुरू की। टेक्निकसल सर्विलांस की मदद से पुलिस ने दिल्ली, हापुड़ और ग्रेटर नोएडा में छापेमारी की। सबसे पहले टीम ने 23 सितंबर को मुकुंदपुर दिल्ली से लोकेश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। इसने अजय कुमार के साथ मिलकर मंगल पांडेय नगर, मेरठ में दो फर्जी कंपनी बनाई हुई थीं।
दोनों खुद को कंपनी का निदेशक बताते थे। पूछताछ के दौरान लोकेश ने बताया कि उसने कंपनी के बैंक खातों का नियंत्रण दीपक गोयल व मनोज चौधरी को दे दिया था। पुलिस ने लोकेश की निशानदेही पर मनोज चौधरी को 25 सितंबर को हापुड़ से गिरफ्तार कर लिया। बाद में पुलिस ने मनोज से पूछताछ के बाद मोहित जैन व केशव कुमार को गौर सिटी मॉल, ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया। इसके बाद पांचवें आरोपी सैफ अली को मोहित की निशानदेही पर शाहदरा, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। छानबीन के दौरान गिरोह के सरगना मोहित जैन ने बताया कि वह पूरे भारत में चल रही डिजीटल अरेस्ट धोखाधड़ी के गिरोह से जुड़ा है। इनका काम अपने गिरोह के लोगों को फर्जी कंपनी व बैंक खाते उपलब्ध करवाना है। बदले में इनको 2 से 3 फीसदी कमिशन मिलता है। ठगी की रकम चूंकि कई-कई करोड़ होती है, इसलिए इनका कमिशन कई बार करोड़ों में चला जाता है। मोहित बाकी खाता धारकों व गैंग के लोगों को इस 2 से 3 फीसदी कमिशन में से रकम देता है। ठगी की बाकी रकम विदेश में बैठे गिरोह के लोग ले जाते हैं।
हजारों लोगों के साथ कर चुके है ठगी
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि इन लोगों ने हजारों लोगों के साथ ठगी की है। छानबीन के दौरान 473 शिकायतें इस गिरोह से लिंक हो गई हैं। इनमें कई मामलों में एक-एक पीड़ितों से एक करोड़ से 50 लाख से ज्यादा की ठगी हुई है। आरोपी मोहित व केशव कुमार की पुलिस को मई दिल्ली में ठगी के मामले में तलाश थी। मोहित के खिलाफ पहले भी ठगी के कई मामले दर्ज है। पुलिस इनसे पूछताछ कर इनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है।