मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा बताते हैं कि एलवीएडी मशीन दिल के किसी एक चैंबर में लगाई जाती है, जो बैटरी से संचालित होती है। इसे लगाने के बाद व्यक्ति एक तरह से मशीन मैन कहलाता है। शुभांकर का हार्ट का प्रत्यारोपण करना ही था, इसीलिए डोनर मिलने के बाद हाल ही में डॉक्टरों ने इस सर्जरी को सफलता पूर्वक पूरा कर लिया।
वरिष्ठ डॉ. केवल कृष्ण बताते है कि देश में हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी अपेक्षा डोनर कम मिल रहे हैं। ऐसे में एलवीएडी डिवाइस वारदात साबित हो रही है। उनका कहना था कि वर्ष 2016 में सबसे पहले 71 वर्षीय मरीज आरपी गर्ग को देश में पहली बार एलवीएडी हार्ट मेट थ्री इम्प्लांट किया गया था।
दो वर्ष पूरे होने के बाद भी गर्ग स्वस्थ हैं। डॉ. रजनीश मल्होत्रा ने बताया कि इस समय युवाओं में शराब, धूम्रपान, अनियमित जीवनशैली रक्त धमनियों में अवरोध पैदा कर रही है। इसका परिणाम यह होता है कि मरीज को सीधे एंजियोप्लास्टि, ओपन हार्ट सर्जरी या फिर ह्दय प्रत्यारोपण ही विकल्प बचते हैं।