कीमतों के बढ़ने का एक बड़ा कारण एक्साइज ड्यूटी बढ़ना है और फिलहाल इसे कम करने के पक्ष में सरकार बिल्कुल नहीं है। गौरतलब है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की मांग की थी, लेकिन वित्त मंत्री जेटली ने बजट पेश करने के दौरान इस मांग को नजरअंदाज कर दिया था।
2017 के जून से पेट्रोल और डीजल के दाम रोजाना तय होते हैं। ऐसे में लोगों को पता नहीं चलता कि रोज-रोज पांच-दस पैसे करके अब तक पेट्रोल-डीजल कितने महंगे होते जा रहे हैं।
वो मोदी सरकार जो मनमोहन सरकार को महंगे पेट्रोल डीजल के लिए कठघरे में खड़ा करती थी वो अब अपने शासन काल काल में ही इनकी कीमतों पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह से नाकाम रही है। 26 मई 2014 को जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी उस वक्त दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपए थी और डीजल के दाम 56.71 रुपए थे।