- राजधानी में दमकल के पास आग बुझाने के इंतजाम पर्याप्त नहीं, अनाधिकृत कॉलोनियां सबसे बड़ी बाधा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में आग लगने की घटनाओं पर काबू पाना आज भी दमकल विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना है। अनियोजित विकास के बीच अग्निशमन व्यवस्था कई मोर्चों पर कमजोर नजर आती है। खासकर अनाधिकृत कॉलोनियों में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां संकरी गलियां और अव्यवस्थित ढांचा दमकल वाहनों की पहुंच में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की करीब 70 से 80 प्रतिशत आबादी अनाधिकृत कॉलोनियों में निवास करती है। इन क्षेत्रों में आग लगने पर दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंंचने में काफी मशक्क्त करती पड़ती है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि फायर कर्मियों को 100 मीटर या उससे अधिक दूरी तक हौज पाइप जोड़कर आग बुझाने का प्रयास करना पड़ता है। इससे समय की बर्बादी और आग के फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
शॉर्ट-सर्किट से होती हैं 80 प्रतिशत से अधिक घटनाएं : अनाधिकृत कॉलोनियों में बिजली के तारों का जाल अव्यवस्थित तरीके से फैला हुआ है। पुराने और जर्जर वायरिंग सिस्टम पर अत्यधिक लोड होने के कारण शॉर्ट सर्किट की घटनाएं आम हो गई हैं। अधिकारियों की मानें तो दिल्ली में होने वाली 80 प्रतिशत से अधिक आग की घटनाएं शॉर्ट सर्किट के कारण होती हैं। 2026 में अप्रैल तक ही 7,800 से अधिक आग लगने की कॉल्स दर्ज की जा चुकी हैं।
विभाग का दावा: अधिकतर के पास एनओसी : दिल्ली में तेजी से बढ़ रही हाईराइज इमारतों में अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से किया जा रहा है। दिल्ली फायर सर्विस का दावा है कि अधिकांश व्यावसायिक और आवासीय ऊंची इमारतों के पास फायर एनओसी मौजूद है। नियमों के तहत व्यावसायिक भवनों को हर तीन वर्ष में और नई इमारतों को पांच वर्ष में अपनी एनओसी का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इन नियमों का पालन मुख्य रूप से अधिकृत और नई इमारतों तक ही सीमित है।
ऐसे मिलती है दिल्ली फायर से एनओसी : नई व्यावसायिक इमारतों के निर्माण से पहले एमसीडी, डीडीए, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड जैसी एजेंसियां बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देती हैं। इसके बाद फायर सर्विस की जांच के तहत रूल 33 के अनुसार अग्नि सुरक्षा के इंतजाम सुनिश्चित किए जाते हैं। इनमें छह मीटर चौड़ा रास्ता, पर्याप्त चौड़ाई वाली सीढ़ियां और अंडरग्राउंड वाटर टैंक जैसी सुविधाएं अनिवार्य होती हैं। सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही एनओसी जारी की जाती है।
दमकल की 336 में से 50 गाड़ियों की सेवा बाधित : अगर दमकल विभाग के संसाधनों की बात करें, तो वर्तमान में दिल्ली फायर सर्विस के पास 336 दमकल गाड़ियां हैं, जिनमें से लगभग 50 विभिन्न कारणों खड़ी रहती हैं। इसके अलावा 20 बाइक और 24 क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल (क्यूआरवी) भी उपलब्ध हैं। विभाग के पास 71 फायर स्टेशन हैं, जिनमें से 67 चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं। करीब तीन हजार दमकल कर्मी पूरे शहर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ये हैं विभाग के पास उपकरण :
- 53 मीटर ऊंचाई तक काम करने वाले 9 आर्टिकुलेटेड वाटर टॉवर (एडब्ल्यूटी)
- 42 मीटर ऊंचाई की 2 ब्रांटो स्काई लिफ्ट और 33 मीटर ऊंचाई का एक टर्न टेबल लैडर
- 70 मीटर का एक ब्रांटो अपनी समयावधि पूरी कर चुका है, जिसका नवीनीकरण प्रस्तावित है।
90 मीटर ऊंचाई के ब्रांटो की खरीद प्रक्रिया शुरू : बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अब 90 मीटर ऊंचाई तक काम करने वाले ब्रांटो की खरीद प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए डीएमआरसी द्वारा ग्लोबल टेंडर जारी किया जा रहा है और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।