स्प्रिंकलर होता तो नहीं फैलती आग
अग्निशमन विभाग का कहना है कि अस्पताल में बेसमेंट को छोड़कर किसी भी कमरे या लॉबी में स्प्रिंकलर नहीं लगे थे जिससे आग फैल गई। अगर स्प्रिंकलर होते तो आग नहीं ंफैलती। स्प्रिंकलर फायर फाइटिंग सिस्टम के तहत बड़ी बिल्डिंगों में लगाए जाते हैं। आग लगने की स्थिति में स्प्रिंकलर फट जाता है और उससे पानी निकलने लगता है। ऐसे में आग फैलने से रुक जाती है। स्प्रिंकलर बड़ी व ऊंची बिल्डिंग में लगाना अनिवार्य है।
सॉकेट शॉर्ट सर्किट से लगी थी आग
अग्निशमन विभाग की जांच में यह बात साफ हो गई है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी। जिस सीसीयू यूनिट में आग लगी थी। वहां काफी बिजली के सॉकेट लगे थे। यहीं एक सॉकेट से प्लग लगाकर पानी गर्म किया जा रहा था तभी स्पार्किंग से आग लग गई। देखते ही देखते आग पास में रखे बेड, पाइप में लग गई और फैलती चली गई।
2018 में नहीं किया गया था लाइसेंस रिन्यू
वर्ष 2017 के बाद से मेट्रो अस्पताल को अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं मिली थी वर्ष 2018 में लाइसेंस रिन्यू के लिए मेट्रो अस्पताल प्रबंधन ने अग्निशमन विभाग को प्रपत्र दिए थे, लेकिन विभाग ने रिन्यू से मना कर दिया था। एफएसओ कुलदीप कुमार ने बताया कि उस वक्त जांच में फायर फाइटिंग सिस्टम में कमियां पाई गई थीं। इससे कारण लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हुआ। फायर फाइटिंग सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए मेट्रो अस्पताल प्रबंधन को कई बार नोटिस भेजा गया, लेकिन इसमें सुधार नहीं किया।
55 लोगों की टीम ने चलाया राहत व बचाव कार्य
हादसे के बाद अग्निशमन विभाग के 55 लोगों की टीम ने करीब एक घंटे तक राहत व बचाव कार्य चलाया और सफलतापूर्वक इसे पूरा कर लिया। इसके अलावा पुलिस की टीम भी सहयोग कर रही थी। अग्निशमन विभाग की टीम में विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अमन शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी अरुण कुमार सिंह समेत पांच एफएसओ व फायरकर्मी शामिल थे। इस अभियान में अग्निशमन अधिकारी कुलदीप कुमार का दस्ता सबसे आगे था।