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Action: दिल्ली में 11 श्रेणियों की इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य, यहां देखें किन भवनों के लिए है ये जरूरी

Thu, 18 Jun 2026 06:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दमकल विभाग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर भवन मालिकों और संचालकों से कहा है कि जिन भवनों के पास वैध फायर एनओसी नहीं है, वे तत्काल आवेदन करें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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राजधानी में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं के बीच दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) ने स्पष्ट किया है कि 11 श्रेणियों की इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर एनओसी) अनिवार्य है। विभाग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर भवन मालिकों और संचालकों से कहा है कि जिन भवनों के पास वैध फायर एनओसी नहीं है, वे तत्काल आवेदन करें। साथ ही दो या अधिक स्तर वाले बेसमेंट को भी फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र के दायरे में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।

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डीएफएस के अनुसार, राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता-2026, दिल्ली फायर सर्विस अधिनियम-2007 और नियम-2010 के तहत निर्धारित श्रेणियों के भवनों में अग्नि सुरक्षा उपाय और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य है। विभाग का कहना है कि हालिया कई अग्निकांड के बाद यह नोटिस लोगों को जागरूक करने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।

नोटिस के मुताबिक 15 मीटर से अधिक ऊंचाई अथवा पांच या अधिक मंजिल वाले आवासीय और व्यावसायिक भवनों को फायर एनओसी लेनी होगी। वहीं 12 मीटर से अधिक ऊंचाई या चार अथवा अधिक मंजिल वाले होटल और गेस्ट हाउस भी इस दायरे में आते हैं। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, संस्थागत और वाणिज्यिक भवनों के लिए नौ मीटर से अधिक ऊंचाई या तीन अथवा अधिक मंजिल होने पर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी है।
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इसके अलावा 250 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले औद्योगिक, सभा और भंडारण भवनों तथा 100 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले खतरनाक गतिविधियों से जुड़े भवनों को भी फायर एनओसी रखना अनिवार्य है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दो या उससे अधिक स्तर वाले बेसमेंट वाले भवनों को भी फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा।

एनओसी लेने के बाद नवीनीकरण कराना जरूरी : डीएफएस अधिकारियों के अनुसार आवासीय भवनों (होटल छोड़कर) के लिए जारी फायर एनओसी पांच वर्ष तक वैध रहती है, जबकि होटल समेत अन्य गैर-आवासीय भवनों के लिए इसकी वैधता तीन वर्ष है।

प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने पर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नवीनीकरण कराया जा सकता है। हाल के महीनों में मालवीय नगर, पालम, विवेक विहार और गोविंदपुरी में हुई आग की घटनाओं में कई लोगों की जान गई है। इन्हीं घटनाओं के बाद फायर विभाग ने भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष जोर देना शुरू किया है।

इन भवनों के लिए जरूरी है फायर एनओसी

  • 15 मीटर से ऊंचे आवासीय भवन
  • 15 मीटर से ऊंचे व्यावसायिक भवन
  • 12 मीटर से ऊंचे होटल व गेस्ट हाउस
  • 9 मीटर से ऊंचे शैक्षणिक भवन
  • 9 मीटर से ऊंचे संस्थागत भवन
  • 9 मीटर से ऊंचे वाणिज्यिक भवन
  • 250 वर्गमीटर से बड़े सभा भवन
  • 250 वर्गमीटर से बड़े औद्योगिक भवन
  • 250 वर्गमीटर से बड़े भंडारण भवन
  • 100 वर्गमीटर से बड़े खतरनाक भवन
  • दो या अधिक स्तर वाले बेसमेंट वाले भवन
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दिल्ली में सत्य निकेतन के एक रेस्तरां में आग लगी

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन स्थित एक रेस्तरां में बुधवार सुबह आग लग गई। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अधिकारियों ने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि डीएफएस को सुबह छह बजकर 10 मिनट पर सत्य निकेतन में मदर डेयरी के पास स्थित एक रेस्तरां में आग लगने की सूचना मिली जिसके बाद दमकल की कई गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि आग रेस्तरां के भूतल पर रखे फर्नीचर एवं बर्तनों तक सीमित रही और सुबह छह बजकर 50 मिनट तक उस पर काबू पा लिया गया। गनीमत रही की आग सुबह-सुबह लगी। अगर शाम के समय ये आग लगती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

नरेला और जनकपुरी में बिना फायर एनओसी चल रहे होटलों पर शिकंजा
लोगों की जान जोखिम में डालकर चलाए जा रहे होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर प्रशासन ने शिकंजा कसा है। नरेला के ड्रीम रेजिडेंसी, होटल ब्लू स्टार और होटल निर्वाण समेत कई प्रतिष्ठानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आई है। पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी और राजौरी गार्डन में भी कई होटल और गोदाम जांच के दायरे में आए हैं। होटल पैराडाइज इन और होटल नवादा रेजिडेंसी जैसे प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच में इन स्थानों पर फायर सेफ्टी व्यवस्था और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान से जुड़ी कमियां पाई गईं।

राजस्व विभाग की जांच में राजधानी के कई इलाकों में ऐसे होटल मिले, जो बिना जरूरी अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) के संचालित हो रहे थे। 5 से 17 जून के बीच 844 साइटों की जांच की गई, जिसके बाद ये सच्चाई सामने आई है। हैरान कर देने वाली बात ये रही कि दिल्ली में लगातार हो रही भीषण अग्निकांड की घटनाओं से भी इन होटलों ने सबक नहीं लिया और इनके संचालक इन्हें चलाते रहे। 17 जून को दिल्ली नगर निगम ने 26 स्थानों पर कार्रवाई करते हुए 16 अवैध संपत्तियों को सील किया।
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