अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के टीचिंग ब्लॉक में लगी भीषण आग ने मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ा दी है। आग में जली जांच रिपोर्ट ने मरीजों के उपचार पर फिलहाल के लिए फुल स्टॉप लगा दिया है। मंगलवार को एम्स के सर्जरी से लेकर यूरोलॉजी सहित कई विभागों की ओपीडी में करीब 10 दिन बाद फॉलोअप के लिए पहुंचे मरीजों को जब जांच रिपोर्ट टीचिंग ब्लॉक में जलने की जानकारी मिली तो वे हक्का-बक्का रह गए।
पहले कार्ड बनवाने, फिर ओपीडी में घंटों इंतजार और उसके 10 दिन बाद फिर वापस आकर ओपीडी में डॉक्टर तक बैठने की मारामारी की कहानी सुनाते हुए मरीज अपनी लाचारी भी जता रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों के पास भी दोबारा जांच कराने की सलाह देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
मरीजों ने कहा कि अब उन्हें दोबारा जांच कराने के लिए कहा है, लेकिन इस समय एम्स में हालात यह है कि काउंटर एक या दो हैं और उन पर मरीजों की काफी लंबी लाइनें हैं। उधर, कंप्यूटर से भी मरीजों का डाटा नष्ट हो गया है। ज्यादातर कंप्यूटर जल गए हैं और कोई इक्का-दुक्का बचा भी है तो उसमें रिकवरी की कोई संभावना नहीं है।
कब आएगी रिपोर्ट, पता नहीं?
बिहार के आरा निवासी विश्वजीत वर्मा ने बताया कि वे दो सप्ताह पहले एम्स में अपनी बेटी को लेकर आए थे। उनकी बच्ची को पेट में दर्द के साथ तेज बुखार रहता है। वह ना खाती है और ना कुछ पी पाती है। डॉक्टरों ने कई तरह की जांच लिखी थीं, जिनकी रिपोर्ट मंगलवार को आनी थी, लेकिन अब पता चला कि इमारत में आग लगने से सब खत्म हो गया।
डॉक्टर के कहने पर वे दोबारा जांच के लिए पहुंचे तो पहले इधर-उधर भेज दिया। आखिर में एक काउंटर मिला तो वहां काफी देर बाद नंबर आया। अब रिपोर्ट कब तक आएगी, ये किसी ने नहीं बताया।
दूसरे अस्पतालों का दिखाया रास्ता
दिल्ली के विवेक विहार निवासी मूलचंद डागर ने बताया कि वे पिछले सप्ताह मंगलवार को यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में पहुंचे थे। उन्हें यूरिन से जुड़ी काफी परेशानी है। डॉक्टरों ने मेडिकल जांच कराई थी, परंतु मंगलवार को उन्हें आग में सब कुछ जलने की बात पता चली।
डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी है कि वे दिल्ली के दूसरे अस्पताल में जाकर उपचार ले सकते हैं। मूलचंद का कहना है कि दूसरे अस्पताल जाना ही था तो इतने दिन एम्स में चक्कर लगाने का कोई मतलब नहीं है।