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आयुष विभाग में वित्तीय अनियमितता, एसआईटी से जांच की मांग

Mon, 25 Feb 2019 05:17 AM IST
राजेश सैनी धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली
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कैग (सांकेतिक तस्वीर)
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दिल्ली सरकार के आयुष विभाग में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के इस्तेमाल में अनियमितता बरती गई। यह दावा सीएजी रिपोर्ट 2018 के आधार पर जनहित याचिका दायर कर किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि आयुष के अंतर्गत आने वाले तीन बड़े अस्पतालों, दवा की खरीद, कर्मचारियों की नियुक्ति व योजनाओं के विज्ञापन में 2012 से 2017 की अवधि में वित्तीय अनियमितता हुई। इन वित्तीय अनियमितताओं की जांच हाईकोर्ट के पूर्व जज की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की गई है। 26 फरवरी को इस याचिका पर सुनवाई होगी। 

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पेश जनहित याचिका अधिवक्ता तरुण नारंग की ओर से अधिवक्ता संजय सहगल व तनु सिंघल ने दायर की है। याचिका में दिल्ली सरकार के आयुष विभाग में आने वाली आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथी, तीन अस्पतालों सुर होम्योपैथिक मेडिकल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (एसएचएमसी), चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक चरक संस्थान व तिब्बिया मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल के संबंध में सीएजी रिपोर्ट को याचिका का आधार बनाया गया है। याचिका में दिल्ली सरकार, आयुष के महानिदेशक तथा स्वास्थ्य सचिव को पक्षकार बनाया गया है। 

याचिका में कहा गया कि आयुष निदेशालय व उसके तीनों अस्पतालों ने 2012-17 की अवधि में करीब 93 करोड़ की दवाएं बिना कोई टेंडर जारी किए खरीदीं। इन दवाओं की खरीद सप्लायरों की सिफारिश पर की गई। इसके अलावा आयुर्वेद की 47 करोड़ की दवाएं सरकार द्वारा तय आईएमपीसीएल से न खरीद कर अन्य निर्माताओं से खरीदी गईं। इसमें केंद्र सरकार की ओर से तय नीति का पालन नहीं किया गया। 
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दवा खरीद की नीति के मुताबिक, खरीद की तारीख पर दवा की उपयोगिता अवधि 60 फीसदी से अधिक होनी चाहिए, लेकिन इस अवधि में सात लाख की ऐसा दवा खरीदी गईं, जिनकी उपयोगिता अवधि इससे कम थी। ऐसा ही गर्भधारण जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले 1600 कार्ड के मामले में हुआ, जिस दिन खरीदा तब यह 10 माह पुराने थे। याचिका में कहा गया कि आयुष विभाग निदेशालय व तीनों अस्पतालों ने 2015-17 की अवधि के दौरान 1.11 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए, लेकिन इसके जरूरी मुख्यमंत्री अथवा उप मुख्यमंत्री की अनुमति नहीं ली गई।

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सरकार के राज्य औषधीय वनस्पति बोर्ड बनाने के लिए जो राशि मंजूर की थी, उसमें 31.57 करोड़ रुपये की राशि इस्तेमाल ही नहीं हुई क्योंकि बोर्ड बनाने के लिए कोई योजना आयुष ने तैयार नहीं की। इस योजना के अंतर्गत बनाई जाने वाली 100 होम्योपैथी क्लीनिक, 25 आयुर्वेदिक, 25 होम्योपैथी व 10 यूनानी औषधालय बनाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसके अलावा मौजूदा तीनों अस्पतालों में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड व अन्य मशीनों के न होने का मुद्दा उठाया गया है। 

याचिका में कहा गया कि जहां एक ओर इन अस्पतालों में स्टाफ की कमी के कारण कामकाज प्रभावित होने की बात कही गई तो वहीं दूसरी ओर बाहर से संविदा स्टाफ लेने के लिए 12.35 करोड़ रुपये 2012-17 के बीच बिना अनुमति के खर्च किए गए। आयुष के तीनों अस्पतालों द्वारा करीब 38 लाख रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी गई, लेकिन रेडियोलॉजी स्टाफ न होने के कारण यह मशीन बेकार पड़ी रहीं। चौधरी ब्रह्मप्रकाश अस्पताल की प्रयोगशाला में काम आने वाले 33 लाख की लागत के उपकरण पड़े-पड़े बेकार हो गए। इसमें इस्तेमाल होने वाले 13 लाख रुपये के रसायन भी खराब हो गए। 

वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि राजधानी की 103 होम्योपैथी औषधालयों के कंप्यूटरीकरण के लिए 2006-12 की अवधि में 57 लाख की लागत से 118 कंप्यूटर व 87 होम्योपैथी सॉफ्टवेयर खरीदे गए लेकिन केवल 28 औषधालयों का ही कंप्यूटरीकरण हो पाया। सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए तिब्बिया कॉलेज में 300 बेड में से 112 बेड बिना देखरेख व रखरखाव के बेकार हो गए। इसके अलावा क्लिनिकल सुविधाओं में सुधार के लिए 1.90 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल नहीं हो सका। इसके अलावा यहां दवाएं लंबे समय तक खुले में रखे जाने के कारण खराब हो गईं। 
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