'गुरुग्राम की सरकार’ के लिए रविवार को मतदान हुआ। छिटपुट विवाद के बीच चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। चुनाव में महज 54.57 फीसदी लोगों ने शहर के सरकार के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतदान के दौरान फर्जी वोटिंग व बूथ कैप्चरिंग को लेकर प्रत्याशियों के कार्यकर्ताओं के बीच अरोप-प्रत्यारोप लगाकर विरोधी कार्यकर्ता आपस में टकराते रहे, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी की वजह से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
रविवार सुबह 06.00 बजे मतदान के लिए सभी 546 बूथों पर मतदान के लिए मॉक पोल शुरू हुई। 1600 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर वोटिंग से पहले चेक किया गया।
सुबह 07.00 बजे से मतदान शुरू हुआ। शुरुआती दस मिनट में कोई मतदान शुरू नहीं हुआ। शुरुआत में करीब 53 ईवीएम मशीनों के खराब होने की शिकायत आई, बाद में रिर्जव रखी ईवीएम से तब्दील कर वोटिंग शुरू करवाया गया।
सुबह तीन घंटे में महज 8.12 फीसदी ही मतदान हुआ था। समय के साथ-साथ वोटिंग प्रतिशत में बढ़ोतरी होती गई। उपायुक्त विनय प्रताप, विधायक उमेश अग्रवाल समेत अन्य अधिकारियों ने भी अपने वोट यहां डाले।
चुनाव में युवा से लेकर बुजुर्गों की दिलचस्पी दिखी। सभी लाइन में लगकर वोट डालते रहे। दोपहर में लोगों की अधिक भीड़ दिखी। शाम 05.00 बजे तक लोगों में मतदान प्रक्रिया चलती रही। दिनभर कुछ जगहों पर झड़प की खबरें आती रही।
फर्जी वोटिंग व बूथ कैप्चरिंग को लेकर हुआ विवाद
कार्टरपुरी में एक ही परिवार के दो महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में थी। एक भाजपा तो दूसरी निर्दलीय, चुनाव के वक्त दोनों के कार्यकर्ता ही आपस में भीड़ गए। वार्ड-15 में फर्जी वोट डालने आई महिला को लोगों ने पकड़ लिया। सबसे अधिक पार्टियों का फोकस वार्ड-1 व वार्ड-7 पर रहा। दोनों महिला एससी सीट है।
शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान सम्पन्न करवाने के लिए 1794 पोलिंग ऑफिसर तैनात थे। चुनाव के वक्त तैनात 51 ड्यूटी मजिस्ट्रेट विभिन्न बूथों पर दौरा करते रहे।
अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा तैयार नगर निगम चुनावों के लिए 228 संवेदनशील व अति संवेदनशील बूथों पर ज्यादा निगरानी रखी गई। अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप दहिया का कहना है कि जिले में शांतिपूर्ण चुनाव रहा। किसी भी लोगों को दिक्कत आने नहीं दी गई।