मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में दिये भाषण में कहा कि यह विधेयक दिल्ली के लाखों अभिभावकों के दर्द और उम्मीदों का जवाब है। उन्होंने कहा, दिल्ली की आत्मा मध्यमवर्गीय गलियों और छोटे फ्लैटों में बसती है, जहां माता-पिता अपने सपनों की कुर्बानी देकर बच्चों का भविष्य संवारते हैं। शिक्षा को मुनाफे की दुकान नहीं बनने देंगे। इस बिल को शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने पेश किया, जिन्हें सीएम ने कम समय में विशेषज्ञों और अभिभावकों से चर्चा कर इसे तैयार करने के लिए बधाई दी।
एक से दस लाख तक का जुर्माना
विधेयक के तीन बड़े प्रावधान अभिभावकों को राहत देने वाले हैं। पहला, पारदर्शिता है, जिसमें अब कोई निजी स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। फीस बढ़ाने से पहले स्कूल को अपनी लोकेशन, सुविधाएं, खर्च और शिक्षण स्तर की पूरी जानकारी देनी होगी। बिना अनुमति फीस बढ़ाने पर 1 लाख से 10 लाख तक का जुर्माना लगेगा। बार-बार नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है या सरकार खुद स्कूल का संचालन करेगी। दूसरा, तीन-स्तरीय नियामक प्रणाली है, जिसके अंतर्गत स्कूल स्तर पर समिति, जिला स्तर पर शिक्षा निदेशक की समिति और राज्य स्तर पर स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण होगा। इनमें अभिभावक, शिक्षक और प्रबंधन शामिल होंगे। तीसरा, अभिभावकों को इसमें ताकत दी गई है, जिसके तहत फीस बढ़ाने के लिए स्कूल समिति में पांच अभिभावकों में से एक भी असहमत हुआ, तो फीस नहीं बढ़ेगी।
विपक्ष को निशाने पर लिया
रेखा गुप्ता ने विपक्ष, खासकर आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आप के शासन में शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार के गर्त में चली गई। स्कूलों की इमारतें अधूरी रहीं, शिक्षक नियुक्त नहीं हुए और क्लासरूम घोटाले में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ। अदालतें आज सवाल कर रही हैं, लेकिन आप के पास जवाब नहीं। उन्होंने आप की शिक्षा क्रांति को खोखला नारा बताया, जो सिर्फ प्रचार तक सीमित रहा। सीएम ने कहा, ये बिल बच्चों के सपनों की कीमत वसूलने वालों को चेतावनी है। उन्होंने कहा या तो सेवा करो, या सजा भुगतो।
अभिभावकों को सशक्त करता है नया कानून
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये कानून अभिभावकों को सशक्त करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 फीसदी फीस बढ़ोतरी की बात झूठी है। पिछली सरकारों ने चुनिंदा स्कूलों को फीस बढ़ाने की मंजूरी दी, लेकिन हमने पारदर्शी व्यवस्था बनाई। सूद ने बताया कि दिल्ली के 18 लाख बच्चों और उनके माता-पिता को इस कानून से सीधा लाभ होगा। ये विधेयक 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा और दिल्ली के 1,677 निजी स्कूलों पर असर डालेगा।
करीब तीन घंटे तक चली चर्चा
करीब तीन घंटे से अधिक समय तक विधानसभा सदन में चली विधेयक पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी मिली। विधानसभा अध्यक्ष ने वोटिंग के जरिए नए शिक्षा कानून को मंजूरी प्रदान की। नए शिक्षा कानून के पक्ष में 41 वोट, जबकि विरोध में 17 वोट पड़े। इससे पहले शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने करीब एक घंटे तक नए शिक्षा कानून पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री का खास बयान
दिल्ली के अभिभावकों का 52 साल के बाद बनवास खत्म हुआ और उन्हें नया शिक्षा कानून मिला। आशीष भाई एक सुंदर शिक्षा कानून लेकर आए हैं, जो कि अभिभावकों और जनता के हित में है। 11 साल तक आम आदमी पार्टी ने जनता को गुमराह किया, लेकिन हमने चार महीने में ही जनता के लिए ऐतिहासिक काम किया। - रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली
सीएजी रिपोर्ट से श्रमिक नीतियों की पोल खुली
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में पूर्व आप सरकार की श्रमिक नीतियों की पोल खोली। सीएजी की 31 मार्च 2023 की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने बताया कि आप सरकार ने श्रमिकों के लिए 5200 करोड़ रुपये के फंड को खर्च नहीं किया। मजदूरों को 8000 रुपये की सहायता देने का प्रावधान था, लेकिन सिर्फ 2000 रुपये दिए गए। सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और 90,000 श्रमिकों को 8000 रुपये देने का आदेश देना पड़ा। प्रसूति, दिव्यांगता, टूल खरीद, आवास, पेंशन, दुर्घटना मुआवजा और कौशल प्रशिक्षण जैसी योजनाओं का पैसा या तो खर्च नहीं हुआ या न के बराबर उपयोग हुआ। 2018 से 2024 तक टूल सहायता योजना में एक भी श्रमिक को 20,000 रुपये नहीं मिले। मेडिकल सहायता, कोचिंग, स्किल ट्रेनिंग और गर्भपात सहायता जैसी योजनाएं भी कागजों तक सिमटी रहीं।
जीएसटी सुधार विधेयक पास, व्यापारियों को राहत
विधानसभा में शुक्रवार को एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिसमें दिल्ली वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक- 2025 पास किया गया। ये कर सिस्टम को सरल बनाएगा। ये बिल जीएसटी नियमों को केंद्र के सुधारों के साथ जोड़ता है, ताकि पूरे देश में एकसमान कर नियम हों। बिल में इनपुट टैक्स क्रेडिट की समय सीमा बढ़ाने, रजिस्ट्रेशन और रिटर्न प्रक्रिया को आसान करने, जीएसटी अपीलीय अधिकरण शुरू करने और एमनेस्टी स्कीम लाने जैसे कदम शामिल हैं। अपील के लिए जमा राशि 10 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी की गई है। गुटखा कारोबार जैसे क्षेत्रों में यूनिक कोड और मशीन ट्रैकिंग से पारदर्शिता आएगी। एमनेस्टी स्कीम से दिल्ली को 31 मार्च 2025 तक 218 करोड़ रुपये मिले। सीएम ने बताया कि 2024-25 के पहले पांच महीनों में जीएसटी और वैट से 15,535 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जो पिछले साल के 14,500 करोड़ से 7 फीसदी ज्यादा है।