राहत शिविर में रह रहे हिंसा प्रभावितों को अब कोरोना वायरस का डर सताने लगा है। वजह कैंप में भीड़ अधिक होने और साफ-सफाई का न होना है। डॉक्टर भी पीड़ितों को साफ-सफाई रखने के अलावा, लगातार हाथ धोने और मॉस्क के इस्तेमाल की नसीहत दे रहे हैं।
यहां होली फैमिली अस्पताल, सेंट स्टीफन अस्पताल के अलावा डॉक्टर्स यूनिटी वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आए डॉक्टर पीड़ितों के इलाज में जुटे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यहां बच्चे, महिलाएं व बूढ़े तेज बुखार, जुकाम, सर्दी और उल्टी की शिकायतें लेकर आ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि हिंसा प्रभावित लोग पहले ही मानसिक आघात से जूझ रहे हैं। ईदगाह स्थित शिविर में आठ सौ से हजार लोगों के रुकने का इंतजाम किया गया है। एक डॉक्टर ने बताया कि इतने लोगों के लिए ईदगाह के बाहर महज दो शौचालयों (एक महिला व एक पुरुष) का इंतजाम किया गया है।
बारिश ने भी पीड़ितों पर ढाया सितम
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बुधवार देर रात हुई बारिश ने मुस्तफाबाद स्थित ईदगाह में लगे राहत शिविर में खूब सितम ढाया। शिविर में लगे टेंट से पानी चूने लगा। इसके अलावा जमीन पर पड़ी मैट और गद्दे भी भीग गए। ऐसे में लोगों को बैठकर पूरी रात गुजारनी पड़ी।
बारिश का सितम बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। शाम के समय एक बार फिर बारिश हुई। फर्श भीगने की वजह से लोगों का कहना था कि शायद वह बृहस्पतिवार रात को भी नहीं सो पाएंगे।
राहत शिविर में ठहरे हिंसा पीड़ित बृहस्पतिवार को जमीन पर बिछाने वाले मैट और गद्दों को सुखाते हुए दिखाई दिए। शिविर में अपने एक साल की बच्ची के साथ रुकी मोहसिना ने बताया कि उपद्रवियों ने उसके घर में आग लगा दी। पूरा घर जल गया। राहत शिविर में जैसे-तैसे गुजर हो रही थी।
लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर है। बातचीत करते हुए मोहसिना की आंखें भर आई। सलमा ने बताया कि ईदगाह में सभी जगह सरकार ने कपड़े के टेंट लगा दिए। सोने का इंतजाम जमीन पर किया गया। बारिश की वजह से शिविर में बैठना भी मुश्किल हो गया।