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पिता की बिमारी ने इरशाद को बनाया डाक्टर, गांव लाहाबास में बनेगा पहला डाक्टर

Thu, 18 Aug 2016 07:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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पुन्हाना खंड के गांव लाहाबास निवासी सोसिंह के घर पर मंगलवार को उस समय लड्डु बांटकर खुशी मनाई। जब उसके बेटे इरशाद ने सपना साकार कर एआईपीएमटी परीक्षा की ऑल इंडिया जनरल में 415 और ओबीसी में 43 रैंक हासिल की।
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इरशाद गत् वर्ष भी इस परीक्षा में केवल दो अंकों से रह गये थे। लेकिन इस बार पास होने की ठानी और वह पास हो गया। इरशाद ने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पिनगवां के निक्की मॉडल स्कूल से की। इसके बाद सोनीपत के करण मेमोरियल सीनियर सैकेंडरी स्कूल से बारहवीं परीक्षा में 95 फीसदी अंक हासिल किये।

डाक्टर बनने के लिये मोहम्मद इरशाद पिछले दो साल से कोटा-राजस्थान के इंस्टयूट में कोचिंग ले रहा था। वह बुधवार को ही गांव लौटकर आया है। मोहम्मद इरशाद का उनके परिवार और गांव के लोगों ने लड्डू खिलाकर और फूलमाला पहनाकर स्वागत किया।
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डाक्टर बनकर मेवात के लोगों की सेवा करना चाहता है

sd - फोटो : Getty Images
वहीं मोहम्मद इरशाद का कहना है कि मेवात जिला में पहले ही डाक्टरों की भारी कमी है। वह डाक्टर बनकर मेवात इलाके के लोगों की सेवा करना चाहता है। उन्होंने कहा कि उसके पिता का सपना था कि वह डाक्टर बनकर मेवात के लोगों कि सेवा करें। इस कामयाबी में उसके पिता, माता, अध्यपक व चाचा-ताऊ का योगदान हैं। जिन्होने उसे डाक्टर बनने के लिये प्रेरित किया।

मोहम्मद इरशाद के पिता सोसिंह का कहना है कि काफी समय से बिमार हो गया था। मेवात में किसी डाक्टर से उसका इलाज नहीं हुआ, तो वह अलवर फिर जयपुर गया। जहां उसका इलाज हुआ। जिसमें काफी पैसा भी खर्चना पड़ा। तभी से मन में ठान लिया था कि वह अपने बेटे मोहम्मद इरशाद को डाक्टर जरूर बनाएगा। आज उसका सपना साकार हो गया है, वह बहुत खुश है।

मोहम्मद इरशाद के ताऊ सोहराब सरपंच, चाचा अखतर हुसैन सरपंच ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उसके भतीजे ने एआईपीएमटी परीक्षा पास कर उनका मान बढ़ाया है। साथ ही युवाओं को एक सबक भी दिया है। उनका भतीजा गांव में पहला डाक्टर बनेगा। इरशाद की कामयाबी से और बच्चे भी उनसे अनुसरण करेंगे।

वहीं इरशाद की कामयाबी पर उनकी दादी हूरबी पूर्व सरपंच, मां अकबरी, बहन नाईजा, मुमताज, भाभी सकूनत, जीनत, ताई रहीसन और चाचा राबिया और सभी गांव व परिवार के लोगों ने खुशी जाहिर की हैं।

इस मौके पर रामकिशन सरपंच, शमशेर, इमरत, छतरू, रजाक, इसलाम, ताहिर, रशीद, तैयब, फरीद, भूरा कुरैशी, बदलू, हाफिज इदरीश, मुबीन, मकसूद, महमूद, शाहिद सहित काफी गांव के प्रमुख लोग मौजूद थे।
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