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Delhi: बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता को कठोर आजीवन कारावास, पीड़िता ने 17 साल की उम्र में दिया बच्चे को जन्म

Tue, 30 Apr 2024 05:21 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी 44 वर्षीय पिता को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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अदालत ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी 44 वर्षीय पिता को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा, अपराध इतना शैतानी है कि यह कम करने वाली परिस्थितियों पर भारी पड़ा। यह भी देखा गया कि आजीवन कारावास की सजा दोषी को नष्ट किए बिना, सामान्य निवारक के रूप में काम करने के अलावा, न्याय और समाज के हित में भी काम करेगी। पीड़िता ने 17 साल की उम्र में बच्चे को जन्म दिया था।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया उस व्यक्ति के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रही थीं, जिसे पहले अदालत ने दुष्कर्म और बच्चों की सुरक्षा की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने कहा, अपराध की शैतानी प्रकृति और यह तथ्य कि पीड़िता दोषी की बेटी थी और उसकी देखभाल और सुरक्षा में थी, दोषी की व्यक्तिगत परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण है। अदालत ने 22 अप्रैल के फैसले में कहा, आजीवन सजा न्याय के साथ-साथ समाज के हित में भी काम करेगी। इसके अलावा यह दोषी को नष्ट नहीं करेगी, हालांकि यह एक सामान्य निवारक के रूप में काम करेगी। अदालत ने कहा, हालांकि गंभीर कारकों में पीड़िता का मासूम और असहाय बच्चा होना शामिल है, जिसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया।

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हत्या के दोषी को सगाई व विवाह के लिए दो सप्ताह की पैरोल
हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी एक व्यक्ति को सगाई व विवाह के लिए दो सप्ताह की पैरोल दे दी। न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने दोषी राहुल देव को पैरोल देते हुए कहा कि अवधि के बाद तुरंत वह जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करेगा। उसकी पैरोल रिहाई की तारीख से मानी जाएगी। देव को अगस्त 2014 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

मोदी को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कथित तौर पर देवी-देवताओं के नाम पर वोट मांगने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। जस्टिस सचिन दत्ता ने याचिका को पूरी तरह गलत बताया।

याचिकाकर्ता वकील आनंद एस जोंधले ने अदालत से देवताओं और पूजा स्थलों के नाम पर कथित तौर पर वोट मांगने के लिए मोदी के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए कहा था कि यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। साथ ही भारतीय दंड संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अपराध है। जोंधले ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत प्रधानमंत्री को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने के लिए ईसीआई को निर्देश देने की मांग की थी।

जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि याचिका में याचिकाकर्ता पहले से ही मान कर चल रहा है कि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। ऐसी धारणा बना लेना पूरी तरह अनुचित है। इस अदालत के लिए किसी भी शिकायत पर विशेष दृष्टिकोण अपनाने के लिए ईसीआई को निर्देश देना उचित नहीं है। अदालत ने चुनाव आयोग (ईसीआई) की ओर से पेश अधिवक्ता सिद्धांत कुमार की दलील को भी दर्ज किया कि आयोग कानून के अनुसार जोंधले की शिकायत पर गौर करेगा।
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