सिंघु बॉर्डर पर पिछले 20 दिनों से कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े किसानों का विरोध मंगलवार को भी जारी रहा। किसानों की बैठक के बाद आंदोलन के लिए आगे की रणनीति तैयार की गई। पूरे दिन बैठकों का दौर और किसान नेताओं के संबोधन के साथ साथ कहीं पगड़ी पहनाने तो लंगर में बादाम के साथ ठंगई और खजूर भी लोगों को वितरित किए जा रहे थे।
बॉर्डर के एक तरफ किसानों का जमावड़ा तो दूसरी तरफ दिल्ली की तरफ किसी भी हालात से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की मुस्तैदी दिखी। किसानों के आंदोलन में 2000 महिलाओं के पहुंचने की संभावना के मद्देनजर तैयारियां भी की जा रही थी ताकि किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
किसान नेताओं के संबोधन के साथ साथ अरदास और निहंग सिख भी अपने घोड़े और अश्त्र-शस्त्रों के साथ सजे हुए परिधानों में कृषि कानूनों पर अपना विरोध जताते दिखे।
सर्दियों के कपड़े बेचने वालों को नहीं है फुर्सत
मौसम के करवट लेने पर ट्रैक्टरों को कवर किया जा रहा था ताकि रात के वर्ग बुजुर्गों को सर्दी से बचाया जा सके। तापमान के गिरने से जुराब, जैकेट की बिक्री इतनी अधिक हो गई है कि रेहड़ियों और जमीन पर फड़ी लगाने वालों को ग्राहकों से पूरे दिन फुर्सत नहीं मिली।
पोस्टरों के जरिए जता रहे हैं विरोध
बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते नेता तो युवा, महिलाएं सहित अलग अलग वर्ग पोस्टरों और पेंटिंग के जरिये विरोध जताते दिखे। केंद्र के नेताओं के पुतले को दिल्ली की सीमा में लटकाए गए हैं। हर तरफ केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी और कृषि कानूनों की वापसी से पूरा माहौल अलग बन चुका है।
गंदगी से बढ़ी परेशानी
रोजाना हजारों की संख्या में लोगों के खाना, पानी से सड़क के दोनों तरफ गंदगी का आलम है। इससे न केवल सेहत को नुकसान की चिंता सता रही है बल्कि इसकी सफाई न होने से रात के वक्त भी किसानों को दिक्कतें पेश आ रही हैं। खासकर खाने पकाने वाली जगह के पीछे अधिक गंदगी है।