दिल्ली की शीत लहर भी किसानों का हौसला नहीं तोड़ पा रही। ठिठुरन के कारण उनका स्वास्थ्य गड़बड़ाने लगा है लेकिन वे फिर भी डटे हैं। घर से बाहर ट्रैक्टर, टेंट सरीखे अस्थाई आशियाने सर्दी से बचाने में ज्यादा कारगर नहीं हो रहे हैं। यही वजह है कि इस वक्त सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर सर्दी की चपेट में आने वाले आंदोलनकारियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। तीनों सीमाओं पर किसानों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने वाले चिकित्सकों का मानना है कि बीते चार-पांच दिनों में समस्या ज्यादा बढ़ी है। एक लाइव रिपोर्ट...
सिंघु बॉर्डर:
प्रदर्शनकारियों की सहूलियत के लिए कई समाजसेवी संस्थाओं ने स्वास्थ्य जांच शिविर लगा रखा है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टर समेत पैरामेडिकल स्टाफ तैनात है।शिविर में बंगाल से पहुंचे डॉ अंशुमन मित्रा ने बताया कि गत दिनों ठंड बढ़ने के साथ साथ आंदोलनकारी किसानों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ा है। रोजाना करीब 200 मरीज खांसी, जुकाम व फेफड़े में संक्रमण की शिकायत लेकर आ रहे हैं। खांसी व जुकाम आदि के शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों में भी बुजुर्गों की संख्या अधिक है। जबकि एक सप्ताह पहले इस तरह के मरीजों की संख्या कम थी। डॉ मित्रा ने बताया कि परेशानी लेकर आ रहे हैं कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर भी होती है। इनको आपात स्थिति में नजदीकी अस्पताल में भेजा दिया जाता है।
वहीं, एक अन्य चिकित्सक डॉक्टर अभिषेक कुमार ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल अधिकतर लोग मधुमेह और ब्लड प्रेशर से भी पीड़ित हैं। ऐसे में प्रतिदिन करीब 300 ऐसे मरीज अधिक मधुमेह और बीपी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इसमें कुछ ऐसे मरीज भी हैं जिनका मधुमेह और ब्लड प्रेशर का इलाज लंबे समय से चल रहा है, लेकिन दवाइयां खत्म होने के बाद वह दवाई नहीं ले रहे थे।
गाजीपुर बॉर्डर:
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के लिए सात से आठ मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गई है। यहां हर कैंप में औसतन 100 से 150 मरीज रोजाना आ रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि धरना स्थल पर 800 से 900 लोग रोजाना बीमार हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर ठंड लगने, बुखार, जुखाम, खासी, सिरदर्द, दस्त और एलर्जी के मरीज हैं। डॉक्टर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वह पूरे कपड़े पहनकर ही रहे।
एक मेडिकल कैंप में मौजूद डॉक्टर मुदस्सिर ने बताया कि दिल्ली केबाहर से आए किसान यहां डेरों में सो रहे हैं। इतनी सर्दी में ठंडे पानी से नहाने से बहुत से बुजुर्ग लोगों को छाती में संक्रमण, बुखार, जुखाम और खांसी हो रही है। कई लोगों को तो ठंड की वजह से दस्त भी हो रहे हैं। दूसरी जगहों की तरह यहां भी इनके नहाने-धोने के लिए गर्म पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। अपनी छुट्टी के दिन मेडिकल कैंप में सेवा देने आए एम्स के डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि ऐसे मौजूद में सबसे अधिक खतरा हार्ट अटैक का रहता है। पहले से बीमार और बुजुर्गों को खास सावधानी बरने के लिए कहा जा रहा है। कैंप दवाई लेने आ रहे लोगों को कोरोना से बचाव करने और मास्क पहनकर रखने के लिए कहा जा रहा है।
टिकरी बॉर्डर:
टिकरी बॉर्डर पर इस वक्त आठ से दस स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण कैंप चलाए जा रहे हैं। इनमें से प्रत्येक कैंप में रोजाना लगभग 300-400 मरीज दवा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य जांच शिविर संचालन करने वालों के मुताबिक पहले किसानों को सबसे ज्यादा एसिडिटी की समस्या हो रही थी, जिनमें बुजुर्गों की तादाद सबसे अधिक थी। लेकिन ठंडक बढ़ने के कारण अब बड़ी संख्या में लोग सर्दी, खांसी और फिर बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
हरियाणा के फतेहाबाद से आकर टीकरी बॉर्डर पर स्वास्थ्य शिविर चला रहे गुरुवंत सिंह ने बताया कि किसान आंदोलन के शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में लोगों को एसिडिटी गैस्ट्रिक की समस्या हो रही थी। लेकिन जैसे-जैसे आंदोलन का दिन बढ़ रहा है। लोगों को दूसरी कई तरह की समस्याएं भी हो रही हैं। जिनमें हांथ-पैर सुन्न होने, सीने में दर्द होने के मामले सबसे अधिक आए हैं। गुरुवंत सिंह ने बताया कि यहां पर हल्की फुल्की बीमारियों के लिए लोगों के दवाइयां दी जा रही हैं। लेकिन गंभीर मामलों को तुरंत अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है।
हरियाणा के झज्जर से रेड क्रास सोसायटी के तीरथ कुमार ने बताया कि हर दूसरे दिन यहां पर डॉक्टर भी आकर मरीजों को देखते हैं। इस समय लोगों को सर्दी, खांसी, नजला की शिकायत सबसे ज्यादा हो रही है। जब से सर्दी बढ़ गई है, लोगों में कफ की शिकायत भी बढ़ गई है। रेड क्रास सोसायटी के कैंप में रोजाना लगभग 300 लोगों को कफ सीरप और हल्के-फुल्के बुखार से निजात पाने के लिए दवाइयां दी जा रही हैं।