आगामी 15 फरवरी से भट्टा-पारसौल गांव से एक बार फिर किसान आंदोलन की शुरुआत होगी। किसान तीन मुख्य मांगों को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
इस आंदोलन का नेतृत्व 7 मई 2011 में भट्टा-पारसौल कांड के हीरो रहे किसान नेता मनवीर तेवतिया द्वारा किया जाएगा। किसानों ने प्रस्तावित आंदोलन के संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है।
किसानों द्वारा आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। 7 मई 2011 के आंदोलन के दौरान जेल जाने वाले आंदोलनकारियों के साथ-साथ इलाहाबाद, कानपुर, बनारस इटावा और कन्नौज समेत कई जिलों के किसान भी इसमें शामिल रहेगे।
किसान नेता ने बताया कि 15 फरवरी को भट्टा गांव के किरण पाल के खेत से आंदोलन शुरू किया जाएगा जो मुख्य रूप से केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ होगा।
किसानों की मुख्य तीन मांगें भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और मीट निर्यात बंद करने को लेकर ये आंदोलन होगा। मांगों के बारे में बताते हुए मनवीर तेवतिया ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों की आधी जमीन को छोड़कर बाकी जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए।
छोड़ी गई जमीन को प्राधिकरण विकसित करेगा। किसान की अधिग्रहित जमीन को बिल्डर को बेचते समय जमीन की कीमत का 60 प्रतिशत किसान को देना होगा। सरकार ने मीट निर्यात के लिए जो केंद्र बनाए हैं उन्हें बंद करना होगा। इन मांगों से केंद्र सरकार को अवगत कराने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन दिया गया है।