टिकरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन के बीच पुलिस बैरिकेडिंग खोलकर एक एंबुलेंस के जाने के लिए रास्ता बनाते हुए किसान।
ऑल इंडिया किसान सभा के जनरल सेक्रेटरी ने हन्नान मोल्लाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमें इस आंदोलन को आगे ले जाना होगा। सरकार को ये कानून वापस लेने ही होंगे।
भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी एचएस लखोवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हमने कल सरकार से कहा था कि, 'कृषि बिल वापस ले लें। पांच दिसंबर को पूरे देश में प्रधानमंत्री मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। हमने आठ दिसंबर को भारत बंध बुलाया है।'
सुबह से चल रही किसान नेताओं की बैठक शाम करीब 5 बजे खत्म हुई जिसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि कल सरकार के साथ होने वाली बैठक में वो यही मांग रखेंगे कि तीनों बिलों की वापसी से कम वह कुछ स्वीकार नहीं करेंगे।
दिल्ली में कोरोना के खतरे को देखते हुए वकील ओम प्रकाश परिहार ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को तुरंत दिल्ली की सीमाओं से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
किसानों के समर्थन में साहित्यकार डॉ. जसविंदर सिंह ने अपना साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने के बाद कहा कि अगर एक लेखक लोगों की आवाज नहीं उठा सकता तो क्या मतलब बनता है? मैंने पुरस्कारों के लिए लिखना शुरू नहीं किया था। यह बहुत दुखद है कि केंद्र सरकार किसानों पर इतना अत्याचार कर रही है और मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है।
दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को अब चारों ओर से समर्थन मिल रहा है। आज उन्हें बंगाल की मुख्यमंत्री ममत बनर्जी का भी साथ मिल गया है। ममता दीदी ने खुद फोन कर किसानों से बात की और बताया कि वह और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस किसानों के साथ हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने नए कृषि कानूनों को 'क्रूर' बताते हुए शुक्रवार को आरोप लगाया कि संबंधित पक्षों से मशविरा किए बिना इन्हें पारित किया गया और भाजपा किसानों के अधिकारों को कॉर्पोरेट घरानों को बेच रही है। वहीं आज डेरेक ओ ब्रायन सिंघु बॉर्डर पहुंच किसानों से मिले।
हरियाणा के करनाल में एक दूल्हे ने किसान आंदोलन को अपना समर्थन देने के लिए महंगी लग्जरी गाड़ी छोड़कर ट्रैक्टर में अपनी बरात लेकर पहुंचा। दूल्हे ने कहा कि हम भले ही शहरों में बस गए हैं लेकिन हमारी जड़ें खेती में ही हैं। किसान हमारी प्राथमिकता हैं। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि लोगों का समर्थन किसानों के साथ है।
फरीदाबाद सीकरी में पुलिस प्रशासन द्वारा रोके गए किसान वहीं धरने पर बैठकर सेब खाते हुए।
दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर स्थित यूपी गेट पर प्रदर्शन कर रहे किसानों में से एक हैं 80 साल के खानचंद। वह तेज बुखार से तप रहे हैं और लोग उन्हें अस्पताल चलने को कह रहे हैं लेकिन वह किसी भी हालत में धरनास्थल छोड़ने को तैयार नहीं है।
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपनी हिफाजत के लिए ब्लैक कैट कमांडो बनाए हैं। अभी इनकी संख्या 700 है और किसानों का कहना है कि वो ऐसे सात लाख कमांडो बनाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा है कि हम कांग्रेस शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से किसानों के मुद्दे को लेकर कई बार बात कर चुके हैं लेकिन शायद उनकी कोई अपना कारण होगा जिसकी वजह से वो हमें समय नहीं दे रहे।
फरीदाबाद में सीकरी के पास पुलिस ने किसान आंदोलन में भाग लेने वाले किसानों को रोका और उन्हें वापस जाने के लिए पुलिस अधिकारी समझा रहे हैं।
बदरपुर टोल बूथ के पास दिल्ली पुलिस ने नाकेबंदी कर रखी है इसकी वजह से करीबन डेढ़ किलोमीटर लंबा जाम लग गया है।
फरीदाबाद में किसान आंदोलन को लेकर सीकरी के पास तैनात पुलिसकर्मी किसानों के देरी से आने की सूचना पाकर पास के पार्क में धूप सेंकते पुलिसकर्मी।
दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर केंद्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए किसानों ने हवन किया।
फरीदाबाद में किसान आंदोलन को लेकर सीकरी के पास तैनात पुलिसकर्मी किसानों के देरी से आने की सूचना पाकर अपने-अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप देखते व अपने जानकारों को फोन करते हुए।
सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए खाना बन रहा है। प्रदर्शन कर रहे एक किसान से जब बात की तो उन्होंने कहा कि, सरकार को हमारी चिंताओं और कृषि कानून की खामियों के बारे में सुनने में सात महीने लग गए। हम यहां तब ही जाएंगे जब हमारी मांगें मानी जाएंगी।
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं वो डटे रहेंगे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारे पास 3-4 महीने का राशन है, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, हम हटने वाले नहीं हैं।'
कृषि कानूनों के खिलाफ नोएडा के राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बिजनौर से आए एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम पंजाब के किसानों के समर्थन में आए हैं, जब तक कानून वापस नहीं होते हम नहीं जाएंगे।'
गाजियाबाद में किसान आंदोलन की वजह से बॉर्डर बंद होने से उत्तर प्रदेश से दिल्ली आ रहे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। एक यात्री ने बताया, 'मैं बुलंदशहर से आया हूं, मुझे बच्ची का ऑपरेशन कराने एम्स जाना था। मुझे यहां फंसे हुए एक-डेढ़ घंटा हो गया है।'
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर किसान डटे हुए हुए हैं। शुक्रवार सुबह किसान दिल्ली से आने वाली लेन पर पहुंचे और जाम लगा दिया। चंद मिनट बाद खुद ही उस लेन से हटकर दिल्ली जाने वाली लेन पर आ गए। फिलहाल यूपी गेट की ओर वाहनों को नहीं आने दिया जा रहा है। रूट डायवर्ट होने की वजह से जाम की स्थिती बननी शुरू हो गई है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।
बैठक के बाद किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने बताया, सरकार ने एमएसपी और मंडी सहित कई प्रस्ताव दिए हैं हम इन पर आज विचार करेंगे। वहीं, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की नेता प्रतिभा शिंदे ने कहा, हमारी तरफ से बातचीत पूरी हो गई है। हमारे नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार कोई समाधान नहीं देती तो वे आगे बातचीत में शामिल नहीं होंगे। प्रतिभा महाराष्ट्र और गुजरात के किसानों के संगठन लोक संघर्ष मोर्चा की प्रमुख हैं।
दिल्ली में सिविलियन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्यों ने सिंघु बॉर्डर पर तैनात प्रदर्शनकारी किसानों को दवाइयां वितरित कीं। ट्रस्ट के एक सदस्य ने कहा कि आपातकाल के मामले में, इन दवाओं का उपयोग हमारे किसान भाइयों द्वारा किया जा सकता है।
किसान आंदोलन के चलते टिकरी और झाड़ौदा बॉर्डर पूरी तरह से बंद हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, बाड़ूसराय बॉर्डर को केवल हल्के वाहनों जैसे कार या बाइक के लिए खोला गया है। वहीं, झाटीकरा बॉर्डर पर केवल दोपहिया वाहनों के लिए खुला है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि सिंघु, लामपुर, औचंदी, सफियाबाद, पियाओ मनियारी और सबोली सीमाएं बंद हैं। NH 44 दोनों तरफ से बंद है।
किसानों के विरोध के चलते नेशनल हाईवे 24 पर गाजीपुर की सीमा गाजियाबाद से दिल्ली तक यातायात के लिए बंद है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली आने वाले लोगों को अप्सरा, भोपरा और डीएनडी का उपयोग करने की सलाह दी है।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार नौवें दिन जारी है। गुरुवार को सात घंटे से ज्यादा चली चौथे दौर की सरकार और किसानों की बातचीत बेनतीजा रही थी। सरकार का कहना है कि एमएसपी रहेगी, उसे छुएंगे तक नहीं, वहीं किसान इस बात पर अड़े हैं कि संसद सत्र बुलाकर कानून रद्द कराए जाएं। अब पांच दिसंबर को फिर से वार्ता होगी। वहीं किसान नेता कुलवंत सिंह संधू का कहना है कि सरकार ने एमएसपी और मंडी समेत कई प्रस्ताव दिए हैं हम इन पर आज विचार करेंगे।