हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव अटेरना निवासी प्रगतिशील किसान पद्मश्री कंवल सिंह चौहान को नए कृषि कानूनों का समर्थन करने पर लगातार धमकी मिल रही है। विदेश से कॉल कर लगातार उन पर किसान आंदोलन का समर्थन करने का दबाव बनाया जा रहा है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से कॉल करके उनको अपना जमीर बेचने जैसे अपशब्द कहे जा रहे हैं। अनहोनी की आशंका के चलते उन्होंने पुलिस को शिकायत दी है। जिस पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
रामपुर के स्वार में दिल्ली जाने से रोके जाने पर नाराज किसानों ने स्वार-बिलासपुर मार्ग पर जाम लगा दिया है। स्वार-बिलासपुर मार्ग पर जाम की वजह से वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर वाहनों को दूसरे रास्ते से भेजा। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक किसानों का सड़क पर धरना-प्रदर्शन जारी था।
गाजीपुर बॉर्डर पर कानपुर से आए कुछ किसान प्रदर्शनकारियों ने कृषि कानूनों के विरोध में फल, सब्जी और अनाज के स्टॉल लगाए। एक किसान ने कहा कि हम एमएसपी लागू करने की मांग कर रहे हैं जिससे अच्छे से अच्छा रेट किसानों को मिले ताकि बिचौलिया ज्यादा कालाबाजारी न कर पाए और ऊंचे दाम पर न बेच सके।
सिंघु बॉर्डर पर अमर उजाला ने कुछ किसानों से बातचीत की। एक किसान ने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि इन तीनों काले कानूनों को रद्द करे। कानूनों में संशोधन को लेकर किसानों ने कहा कि हमें संशोधन भी मंजूर नहीं है। हम चाहते हैं कि ये तीनों कानून वापस लिए जाए। अगर ऐसा नहीं होता तो हम ऐसे ही डटे रहेंगे और शांतिपूर्ण धरना करेंगे। कुरूक्षेत्र, हरियाणा से आए एक किसान ने कहा कि हमें सर्दी की कोई परवाह नहीं है, चाहे दो साल लग जाएं, हम यहीं डटे रहेंगे। कानून रद्द होने के बाद ही घर जाएंगे। किसानों ने अपनी तरफ से साफ कर दिया है कि जब तक कानून रद्द नहीं हो जाते वो दिल्ली की सीमाओं पर ही डटे रहेंगे।
किसान आंदोलन को शुरू हुए 20 दिन हो चुके हैं। लेकिन किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार अपनी बातों पर अड़ी हुई है। वहीं किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती वो दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कई जगह किसान भ्रम फैला रहे हैं इसलिए इनके मन में भी भ्रम था। उन्होंने कहा कि वे कानूनों का समर्थन करते हैं और अपने जिला स्थानों में जाकर दूसरे किसानों को इनके फायदे बताएंगे। किसी को गुमराह होने की जरुरत नहीं है। हम क़ानूनों में कोई संशोधन नहीं चाहते हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज यूपी से आए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय और प्रादेशिक पदाधिकारी से बातचीत की। उन्होंने तीनों कृषि सुधार क़ानूनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हम क़ानूनों और सरकार के साथ हैं कृषि सुधार क़ानूनों की जरुरत काफी लंबे समय से थी।
केंद्रीय किसान मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज जो किसान मुझसे मिले, उन्होंने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वे बिल और सरकार के साथ हैं। चूंकि कुछ किसान गलत धारणा फैला रहे हैं इसलिए उन्हें भी गुमराह किया गया। जब मैंने उनसे बात की तो उन्होंने बिलों का स्पष्ट समर्थन किया।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खाप चौधरी भी किसानों के समर्थन में उतरे हैं। यहां सोमवार को शाहपुर में आयोजित सर्वखाप पंचायत में केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की गई। साथ ही 17 दिसंबर को किसान आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में कूच करने का निर्णय लिया गया। किसानों से मतभेद भुला कर आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया गया।
सिंघु बॉर्डर से किसान नेता जगजीत सिंह ने कहा कि बड़े दुख से ये बात बतानी पड़ रही है कि आज तक जबसे हमने दिल्ली में आकर आंदोलन लड़ना शुरू किया, यहां तक आते-आते हमारे लगभग 13-14 किसान, रोजाना औसतन एक किसान शहीद हो रहा है। हम 20 तारीख को पूरे देश में इन सभी किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि किसानों की लड़ाई राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी पहले ही दिन लड़ रहे हैं। अफसोस इस बात का है कि भाजपा के प्रधानमंत्री किसानों की बात नहीं सुनते। भाजपा के मुख्यालय पर आज हम उनसे कहने आए हैं कि आपको किसानों की मांगे माननी पड़ेंगी।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मुझे लगता है कि सरकार नहीं चाहती किसी भी हालत में सदन चले। सदन चलते ही किसानों के मुद्दे सामने आ जाएंगे।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने किसान का मुद्दा गंभीर बन चुका है। इसमें पाकिस्तान भी दखल देने की कोशिश कर रहा है। इन सब को देखते हुए मैंने यह गुहार लगाई थी कि संसद का सत्र बुलाया जाए और किसानों के मुद्दों के ऊपर चर्चा कर हल निकाला जाए।
दिल्ली में कृषि भवन में मेंबर्स ऑफ भारतीय किसान यूनियन (किसान) ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बीच एक और बैठक जारी है।
चिल्ला बॉर्डर पर आज दोपहर उस वक्त कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया जब एटा से आए किसानों ने चिल्ला बॉर्डर के रास्ते पुलिस को चकमा देकर दिल्ली की ओर जाने की कोशिश की। हालांकि थोड़ी ही देर में पुलिस सतर्क हो गई और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के साथ ही नोएडा से दिल्ली जाने वाला जो रास्ता खुला था वो भी बंद कर दिया। वाटर कैनन भी तैनात कर दिए गए। पुलिस ने एटा से आए भारतीय किसान यूनियन किसान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन ठाकुर को ओखला पक्षी विहार के रास्ते वापस भेज दिया। इसके बाद वो दो लेन जो नोएडा से दिल्ली जाने के लिए बंद की गई थी उसे फिर से खोल दिया गया।
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक निजी समाचार चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि आप भरोसा रखें नए कानून फायदेमंद होंगे। उन्होंने बताया कि किसानों से तारीख को लेकर बातचीत चल रही है। नए कानूनों की मदद से किसान कहीं भी फसल बेचने को स्वतंत्र हैं।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मैं पंजाब के मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि क्या निजी कंपनियां किसानों के साथ आलू उगाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर रही हैं? क्या उन्होंने उनकी जमीन हड़प ली? आपने इसका विरोध क्यों नहीं किया?
मंगलवार को सिंघु बॉर्डर पर रैपिड एक्शन फोर्स और अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई है।
किसान आज भी जयसिंहपुर-खेड़ा बॉर्डर(राजस्थान-हरियाणा) पर बैठे हुए हैं। उन्हें यहां बैठकर आंदोलन करते तीन दिन हो गए हैं। यहां बैठे गुजरात के एक किसान ने कहा कि तीनों कृषि कानून व्यापारियों के हित में हैं, किसान के नहीं। उनका कहना है कि ये बताया जा रहा है कि गुजरात का किसान बहुत खुश है लेकिन वहां का किसान भी बाकी देश के किसानों की तरह परेशान है।
दो दिन पहले हुई बारिश और पानी के टैंकरों की वजह से सिंघु बॉर्डर के दोनों तरफ जलभराव और कीचड़ के कारण किसान समर्थकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कीचड़ की वजह से कई किसानों के चप्पल और जूते भी इसकी चपेट में आकर खराब हो जा रहे हैं। लोगों को परेशानी न आए इसलिए सड़क किनारे जूते चप्पलों की बिक्री भी हो रही है। लंगर के बाद आसपास बिखरे प्लेट, पानी की बोतलें भी इधर उधर बिखरे होने की वजह से भी आंदोलनकारी किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यहां लगाए गए अस्थायी शौचालयों में किसी में पानी की कमी तो कुछ के दरवाजे बंद नहीं होते हैं। किसान इन बातों को लेकर प्रशासन से नाराज हैं।
किसान आज सिंघु बॉर्डर पर अपने आंदोलन को आगे कैसे बढ़ाना है, इस पर चर्चा करेंगे। किसान आज अगले एक सप्ताह तक आंदोलन को क्या दिशा देनी है इसे लेकर चर्चा करेंगे।
गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन का आज 18वां दिन है। बढ़ती ठंड के बाद भी किसान यहां से हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शन में बैठी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला राम कली ने कहा कि यहां हम कई तकलीफों का सामना कर रहे हैं। लेकिन हम यहां प्रदर्शन के लिए आए हैं क्योंकि हमें न्याय चाहिए।
सिंघु बॉर्डर पर भी किसान आंदोलन के 20वें दिन जमे हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार कानून वापस नहीं लेती तब तक वह यहां से नहीं हटेंगे।
टिकरी बॉर्डर पर डटे हैं किसान
टिकरी बॉर्डर पर 20वें दिन भी किसान ठंड के बावजूद अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं। गौरतलब है कि सोमवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि हम कृषि कानूनों की हर धारा पर बात करने को तैयार हैं। जल्दी ही बैठकर बातचीत की अगली तारीख तय की जाएगी।