किसानों के विरोध के कारण टिकरी बॉर्डर पर स्थित पेट्रोल पंपोंं की बिक्री कम हुई है, जिसके कारण पेट्रोल पंपों को नुकसान हुआ है। भारत पेट्रोलियम के पेट्रोल पंप के मैनेजर ने बताया कि हमें रोजाना लगभग 60,000 रुपये का नुकसान हो रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार बातचीत की इस प्रक्रिया को अंजाम दे रही है उससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस मुद्दे में देरी कर के विरोध करने वाले किसानों का मनोबल तोड़ना चाहती है। सरकार हमारे मुद्दों को हल्के में ले रही है, मैं उन्हें इस मामले का संज्ञान लेने और जल्द ही समाधान निकालने की चेतावनी दे रहा हूं।
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के नेता शिव कुमार काका ने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं कि एक ऐसा माहौल बनाया जाए जिसमें सार्थक संवाद हो सके। उच्चतम न्यायालय ने भी कृषि कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित करने को कहा है। ऐसे में बातचीत के लिए सही माहौल बन सकता है।
योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार लगातार तथाकथित किसान नेताओं और संगठनों के साथ बातचीत कर रही है, जो हमारे आंदोलन से बिल्कुल नहीं जुड़े हुए हैं। यह हमारे आंदोलन को तोड़ने का प्रयास है। सरकार जिस तरह अपने विपक्षी दलों से निपटती से उसी तरह किसानों का विरोध कर रही है।
सिंघु बॉर्डर पहुंचे योगेंद्र यादव ने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं कि उन निरर्थक संशोधनों को बार बार न दोहराएं, जिन्हें हमने पहले ही अस्वीकार कर दिया है। इसके बजाय लिखित में एक ठोस प्रस्ताव लेकर आएं ताकि इसे एजेंडा बनाया जा सके और बातचीत की प्रक्रिया यथाशीघ्र शुरू की जा सके।
किसानों ने इस बार चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकार आग से न खेले वरना बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि हमें सरकार की ओर से कोई ठोस प्रस्ताव मिलेगा तो उसपर विचार किया जा सकता है।
आज एक बार फिर किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उन्हें संशोधन स्वीकार नहीं है। सरकार हर हाल में कानून वापस ले।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि इस लड़ाई में त्रिणमूल कांग्रेस उनके साथ है।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज कहा कि सरकार बार-बार कह रही है कि मंडियां समाप्त नहीं होंगी, एमएसपी खत्म नहीं होगा, फिर भी किसानों को गुमराह किया जा रहा है। किसान के जीवन में खुशहाली लाने के लिए ही पीएम ने कृषि कानूनों में बदलाव किया है। किसान हितों से खिलवाड़ करने वाले ओछी राजनीति कर रहे हैं। जिन्हें किसानों की प्रगति अच्छी नहीं लगती, देश का विकास अच्छा नहीं लगता, किसानों के चेहरे पर खुशहाली अच्छी नहीं लगती, वे लोग किसानों को भड़काने में लगे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत भी यूपी गेट पहुंचे।
यूपी गेट पर किसान आंदोलन में किसान दिवस के मौके पर एक दिन का खाना छोड़ कर किसानों का समर्थन करने के लिए तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने अपने खून से पत्र लिख कर लोगों से अपील की। अपनी अपील में उन्होंने जनता से भी आज एक समय का खाना छोड़ने की अपील की।
ममता बनर्जी के निर्देश पर आज उनकी पार्टी टीएमसी के पांच सांसद सिंघु बॉर्डर पर किसानों का समर्थन करने पहुंचे हैं। इन सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मंडल और मोहम्मद नदीमुल हक शामिल हैं जो आज किसानों से मिले और उन 11 किसानों से बात की जो आज रिले भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
विजय हिंदुस्तानी जो शामली से यूपी गेट पहुंचे हैं उन्होंने कड़ाके की सर्दी में भी शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सीने पर आई लव किसान का स्टिकर लगाया है और हाथ में तिरंगा लिए हुए हैं। उनका कहना है कि किसानों की मांग जायज है तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं।
किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए शामली से आज महिलाएं यूपी गेट पहुंची हैं और किसानों को अपना समर्थन दिया है।
प्रदेशभर से किसान आज गाजियाबाद के यूपी गेट पहुंच रहे हैं। इन लोगों ने अपनी गाड़ियों जैसे ट्रैक्टर और जीप आदि पर आई लव किसान का स्टीकर लगाया है।
किसान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ट्वीट किया, 'पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। वे जीवनभर गांवों और किसानों के विकास के प्रति समर्पित रहे, जिसके लिए सदैव उनका स्मरण किया जाएगा।'
कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन 28वें दिन भी जारी है। यहां एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि, 'किसान दिवस पर मैं मोदी सरकार को एक ही बात बोलना चाहता हूं कि कृषि कानूनों को वापस लेकर हमें आज ये गिफ्ट में दें क्योंकि अबका किसान पढ़ा-लिखा है उन्हें इन कानूनों के बारे में पता है।'
सिंघु बॉर्डर पर किसान केंद्र सरकार की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम इस हवन के माध्यम से चाहते हैं कि सरकार की बुद्धि की शुद्धि हो और वो हमारी बात मान ले।
सिंघु और टिकरी बॉर्डर समेत दिल्ली की उन तमाम सीमाओं पर जहां किसानों का आंदोलन चल रहा है, वहां आम लोग उनके समर्थन के लिए लगातार कई प्रदेशों से पहुंच रहे हैं।
चौधरी चरण सिंह की जयंती के मौके पर उनके समाधिस्थल किसान घाट पर किसान पहुंचना शुरू हो गए हैं। जब उनसे पूछा गया कि कोरोना के इस दौर में आप लोग यहां क्यों इकट्ठा हुए हैं तो वह बोले कि जब चुनावी रैलियां होती हैं तो सरकार को कोरोना का ध्यान नहीं रहता। किसान घाट पर पहुंचे किसान चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।