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बम्हैटा के नाराज किसान परिवार के साथ धरने पर बैठे, कांग्रेस भी उतरी समर्थन में

Sat, 12 Sep 2020 10:13 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद में जमीन पर कब्जे को लेकर बम्हैटा किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। शुक्रवार को नाराज किसान दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से सटी वेव सिटी में ही टेंट लगाकर परिवार संग धरने पर बैठ गए है। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे किसानों ने बिल्डर और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी जमीन कब्जाने के लिए आवाज दबाने का काम कर रहे हैं।

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एक दफ्तर से दूसरे तक चक्कर कटाए जा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उल्टे झूठे आरोप में किसानों पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही। अब अपनी जमीन को बचाने के लिए विवश होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उधर, बड़ी संख्या में किसानों के जुटने पर बिल्डर की तरफ से काम रोक दिया गया। वहीं किसानों को कांग्रेस का भी साथ मिल गया है।

एक्सप्रेस-वे किनारे करीब दो दर्जन गांवों की जमीन लेकर मैसर्स उप्पल चड्ढा हाईटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से वेवसिटी के नाम से एक बड़ा टाउनशिप विकसित की जा रही है, जिसकी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला रहा है।
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किसानों का आरोप है कि उनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन उसके बाद भी शासन-प्रशासन में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उल्टे जिस जमीन का कभी किसानों ने मुआवजा तक नहीं लिया है। उस पर भी कब्जा कराया जा रहा है।

बीते हफ्ते से पुलिस फोर्स की मौजूदगी जमीन की कब्जे की कार्रवाई चल रही है। इसको लेकर किसानों में खासा रोष था। अब आठ किसानों के खिलाफ थाना कवि नगर में बिल्डर की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद किसान लामबंद हो गए है।

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शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान अपने परिवार की महिलाओं के साथ आदित्या वर्ल्ड सिटी के सामने मुख्य द्वारा पर एकत्र हुए। उसके बाद जमीन पर कब्जा की कार्रवाई को रोकने के लिए वेवसिटी परिसर में पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच किसानों के पहुंचने की भनक लगते ही बिल्डर की तरफ से काम बंद कर दिया।

नाराज किसानों ने टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिजेंद्र यादव भी दोपहर में धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन बिल्डर के इशारे पर काम कर रहा है।

थाना कवि नगर में नौ किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना इस बात का सुबूत है। अगर किसान गलत हैं तो उसने वार्ता करने के लिए धरनास्थल पर कोई प्रशासनिक अधिकारी क्यों नहीं पहुंचा। इस मौके पर राकेश यादव, राकेश पाल, चेतराम यादव, फूल सिंह, किशन यादव आदि मौजूद रहे।

किसान बोले-वार्ता को तैयार लेकिन जबरन नहीं होने देंगे कब्जा 
नाराज किसानों ने कहा कि यह हमारी पुस्तैनी जमीन हैं, इसे मुफ्त में नहीं देंगे। हम वार्ता करने को तैयार लेकिन जबरन किसी को जमीन पर कब्जा नहीं देंगे। बिल्डर जमीन खरीदना चाहता है तो सीधे बात करे। किसान सुभाष चंद्र यादव ने आरोप लगाया कि बिल्डर की कोशिश चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाकर किसानों की जमीन जबरन हड़पने की है। हमारा मामला कोर्ट में विचाराधीन है, उसके बाद भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारी बिल्डर के साथ मिलकर जमीन पर कब्जा करा रहे हैं।

किसी गांव में कोई विकास नहीं हुआ 
किसानों की नाराजगी गांवों में विकास को लेकर भी है। स्थानीय किसान डॉ. अशोक कुमार यादव ने आरोप लगाया कि बिल्डर की कोशिश खेती की जमीन पर जल्द से जल्द कब्जा करने की है। जबकि नियमों के तहत तो यह भी तय हुआ था कि गांव में पानी, बिजली, सफाई, सड़क से लेकर तमाम आधारभूत सुविधाएं देनी होंगी, लेकिन बम्हेटा जैसे गांव की सड़कों पर गारा और गहरे-गहरे गड्ढे है। नगर निगम में जाते हैं तो वहां से जीडीए भेज दिया जाता है। जीडीए जाते हैं तो वहां से कह दिया जाता है कि बिल्डर काम कराएगा। अब कोई ये बताने वाला नहीं है कि कौन काम कराएगा।
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