प्राधिकरण के सामने धरना दे रहा किसानों का प्रदर्शन सोमवार को उग्र हो गया। नोएडा के विधायक पंकज सिंह ने किसानों के बीच मौजूद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी से कि अपने चेयरमैन को बोलिए कि लखनऊ में बैठकर तमाशा नहीं देखें। किसानों की समस्याओं को जल्द से जल्द दूर करें। यहां रोज का धरना प्रदर्शन हम झेलें और औद्योगिक विकास आयुक्त (आईडीसी) लखनऊ में बैठकर तमाशा देखते रहें। यह नहीं चलेगा।
बता दें कि किसान अपनी मांगों को लेकर विधायक कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। मौके पर विधायक ने कहा कि इस मामले में आईडीसी ने कुछ नहीं किया तो वह किसानों के साथ धरने में शामिल हो जाएंगे। उन्होंने उद्योग मंत्री और औद्योगिक विकास आयुक्त में 15 दिन में मामले का समाधान करने का अल्टीमेटम दिया है।
इससे पहले भारतीय किसान परिषद के किसानों ने सोमवार को नोएडा के विधायक पंकज सिंह के सेक्टर-26 कार्यालय का घेराव किया। घेराव के दौरान विधायक ने किसानों की मांगों का संज्ञान लेते हुए औद्योगिक विकास आयुक्त को निशाने पर ले लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी को कड़े निर्देश दिए। इससे पहले प्राधिकरण कार्यालय से विधायक कार्यालय तक किसानों के मार्च के दौरान कई स्थानों पर जाम लग गया। किसानों के धरने के 67वें दिन निकाले गए घेराव मार्च में बड़ी तादाद में बुजुर्ग, महिलाएं और युवा शामिल थे।
इस दौरान पुलिस कमिश्नरेट के एडिशनल सीपी, डीसीपी व एसीपी आदि ने किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि किसान बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए। इस बीच किसान और पुलिस के बीच काफी देर नोकझोंक हुई। किसान नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि डेढ़ साल पहले धरने के दौरान विधायक उनके बीच आए थे। उन्होंने वादा करते हुए अनशन तुड़वाया था। इसके बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं। अपनी मांगों को लेकर विधायक का घेराव करने पहुंचे किसान पंकज सिंह के तल्ख तेवर देखकर हैरान हो गए। किसानों के सामने ही विधायक ने प्राधिकरण के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
किसानों की सबसे प्रमुख मांग 81 गांवों के सभी किसानों को 1997 से 10 फीसदी प्लॉट और 64.7 फीसदी मुआवजे की है। इसके अलावा किसान आबादी के मामले की निस्तारण की मांग करते आ रहे हैं। साथ ही पांच फीसदी देय प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। करीब 18 माह पहले किसानों ने नोएडा प्राधिकरण पर करीब चार माह तक धरना दिया था। इसके बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में छह माह के अंदर सभी मांगों के क्रियान्वयन की सहमति बनी थी।