तमिलनाडु के किसानों ने भी दिया समर्थन
सोमवार को गाजीपुर बॉर्डर पर तमिलनाडु के किसान भी पहु्चें। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में वे पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ है। तमिलनाडु की अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य सचिव बी. तुलसी नारायणा ने कहा कि वह 26 नवंबर से ही किसानों के समर्थन में अपने राज्य के किसानों को लामबंद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरे देश के किसानों का है। केंद्र सरकार को हर हालत में नए कृषि कानूनों को वापस लेना होगा। तुलसी नारायणा ने कहा कि 28 दिसंबर को तमिलनाडु के तंजावुर जिले में 40 से 50 हजार किसान ट्रैक्टर लेकर रैली निकालंगे।
सरकार चाहे जितनी बतचीत कर ले लेकिन कृषि कानूनों के समाप्ति के अलावा कोई समाधान नहीं
किसान आंदोलन के 26वें दिन भी टीकरी बॉर्डर पर डटे किसानों के अंदाज में रत्ती भर शिकन नहीं थी। अपने पुराने तेवर में ही किसान नेता मंच से सरकार को ललकार रहे थे। किसान कह रहे थे कि सरकार चाहे जितने दौर की बातचीत कर ले लेकिन तीनों कृषि कानूनों की समाप्ति के अलावा अब आंदोलन का समाधान नहीं होगा। वह दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे, जबतक सरकार उनकी बात नहीं मान लेती।
टीकरी बॉर्डर के मंच पर दिनभर जोशीले भाषणों का दौर जारी था। दूसरी तरफ तेज ठंड के कारण बड़ी संख्या में किसान इधर-उधर बैठे समय काटते नजर आ रहे थे। सोमवार को धूप कम थी तो लोग अलाव और लकड़ी से जलने वाले चूल्हों के पास बैठे थे। मंच के पास ही 15 किसानों का दल भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था। जिनमें से कई किसानों ने हाथों में तख्तियां भी थाम रखी थी। जिस पर कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील लिखी हुई थी। कई तख्तियों पर किसानों के बलिदान देने की बात भी लिखी हुई थी। यहां पर पंजाब से पहुचे महिलाओं के एक समूह से बातचीत हुई।
परमजीत कौर ने बातचीत के दौरान कहा कि सरकार ने अब हद पार कर दी है। इन बूढ़े किसानों का दर्द उसे दिखाई नहीं दे रहा है। यह सरकार की निरंकुशता को दर्शाता है। यदि सरकार के तेवर नहीं बदले तो वह दिन ज्यादा दूर नहीं है कि बीजेपी की हालत कांग्रेस से भी खराब हो जाएगी। देशवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी उम्मीद थी। लेकिन सरकार ने किसानों को इतने दिनों तक दिल्ली की सीमाओं पर बैठाकर अपनी मंशा को जाहिर कर दिया है। यह सरकार गरीबों और किसानों की नहीं है। यह बात जाहिर हो चुका है। इसके बाद महिलाएं इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आगे बढ़ गईं।