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गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की भूख हड़ताल, कहा ये अब आर-पार की लड़ाई, तीनों कानून वापस ले सरकार 

Mon, 21 Dec 2020 11:15 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करते किसान - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में 26 दिनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। उनका हौसला हर दिन बढ़ रहा है। सोमवार को किसानों ने उनकी मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी। सुबह 11 बजे से 11 किसान गाजीपुर प्लाईओवर के ऊपर बने मंच पर हड़ताल पर बैठ गए। शाम पांच बजे तक यह जारी रही। इस दौरान मंच से अन्य किसान नेताओं का संबोधन भी चलता रहा।

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किसानों ने कहा कि अब ये आर-पार की लड़ाई है। सरकार को उनकी मांग माननी ही होगी। किसानों ने कहा कि उनके कई साथी इस आंदोलन में शहीद हुए हैं। इंसाफ की इस लड़ाई में वह आगे भी बलिदान देने को तैयार हैं। जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती पीछे नहीं हटेंगे। हड़ताल आगे भी जारी रहेगी। 

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा देश के अलग-अलग हिस्सों से जो लोग आंदोलन में आना चाहते हैं। सरकार उनको रोक रही है। ऐसा करके केंद्र किसानों के हौसले को कम करना चाहता है, लेकिन यह मंशा वह पूरी नहीं होने देंगे। 
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राकेश टिकैत ने कहा कि जो किसान कृषि बिलों के समर्थन में रैली निकाल रहे हैं। वह उनसे मिलेगे, और जानकारी लेंगे कि इन नए कानूनों से उनको किस प्रकार से फायदा मिल रहा है।

टिकैत ने कहा कि इन कानूनों में ऐसा क्या लाभ है, जो आंदोलन कर रहे किसानों को पता ही नहीं चल पा रहा। उन्होने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, लेकिन इन कानूनों से किसान घाटे में ही जाएगा।  

किसान नेता डाक्टर सतनाम सिंह ने कहा कि किसान संगठन हर बार एक उम्मीद के साथ केंद्र सरकार के साथ वर्ता करने जाते हैं,लेकिन कोई समाधान नहीं निकलता है। इस बार सरकार ने फिर से वार्ता के लिए बुलाया है। इस बार उम्मीद है कि कुछ समाधान निकलेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन इसी प्रकार चलता रहेगा। 
 

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तमिलनाडु के किसानों ने भी दिया समर्थन
सोमवार को गाजीपुर बॉर्डर पर तमिलनाडु के किसान भी पहु्चें। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में वे पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ है। तमिलनाडु की अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य सचिव बी. तुलसी नारायणा ने कहा कि वह 26 नवंबर से ही किसानों के समर्थन में अपने राज्य के किसानों को लामबंद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरे देश के किसानों का है। केंद्र सरकार को हर हालत में नए कृषि कानूनों को वापस लेना होगा। तुलसी नारायणा ने कहा कि  28 दिसंबर को तमिलनाडु के तंजावुर जिले में 40 से 50 हजार किसान ट्रैक्टर लेकर रैली निकालंगे। 

सरकार चाहे जितनी बतचीत कर ले लेकिन कृषि कानूनों के समाप्ति के अलावा कोई समाधान नहीं 
किसान आंदोलन के 26वें दिन भी टीकरी बॉर्डर पर डटे किसानों के अंदाज में रत्ती भर शिकन नहीं थी। अपने पुराने तेवर में ही किसान नेता मंच से सरकार को ललकार रहे थे। किसान कह रहे थे कि सरकार चाहे जितने दौर की बातचीत कर ले लेकिन तीनों कृषि कानूनों की समाप्ति के अलावा अब आंदोलन का समाधान नहीं होगा। वह दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे, जबतक सरकार उनकी बात नहीं मान लेती।

टीकरी बॉर्डर के मंच पर दिनभर जोशीले भाषणों का दौर जारी था। दूसरी तरफ तेज ठंड के कारण बड़ी संख्या में किसान इधर-उधर बैठे समय काटते नजर आ रहे थे। सोमवार को धूप कम थी तो लोग अलाव और लकड़ी से जलने वाले चूल्हों के पास बैठे थे। मंच के पास ही 15 किसानों का दल भूख हड़ताल पर बैठा हुआ था। जिनमें से कई किसानों ने हाथों में तख्तियां भी थाम रखी थी। जिस पर कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील लिखी हुई थी। कई तख्तियों पर किसानों के बलिदान देने की बात भी लिखी हुई थी। यहां पर पंजाब से पहुचे महिलाओं के एक समूह से बातचीत हुई।

परमजीत कौर ने बातचीत के दौरान कहा कि सरकार ने अब हद पार कर दी है। इन बूढ़े किसानों का दर्द उसे दिखाई नहीं दे रहा है। यह सरकार की निरंकुशता को दर्शाता है। यदि सरकार के तेवर नहीं बदले तो वह दिन ज्यादा दूर नहीं है कि बीजेपी की हालत कांग्रेस से भी खराब हो जाएगी। देशवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी उम्मीद थी। लेकिन सरकार ने किसानों को इतने दिनों तक दिल्ली की सीमाओं पर बैठाकर अपनी मंशा को जाहिर कर दिया है। यह सरकार गरीबों और किसानों की नहीं है। यह बात जाहिर हो चुका है। इसके बाद महिलाएं इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आगे बढ़ गईं।
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