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आंदोलन के साथ नौनिहालों को शिक्षा का मंत्र दे रहे हैं किसान

Thu, 17 Dec 2020 05:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
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Class at Singhu Border - फोटो : Amar Ujala
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पंजाब के आनंदपुर साहिब के किसानों के एक समूह ने सिंघु और टीकरी बॉर्डर के आसपास झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत कर दी है। बच्चों को इस आंदोलन के बीच से कुछ वक्त निकालते हुए ज्ञान देने वाले गुरु की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। लेखक बीर सिंह ने तंबू को कक्षा बना दिया है तो वकील दिनेश चड्ढा भी संस्था ‘सेवा’ की इस पहल में उनके साथ हैं।

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बॉर्डर पर अपनी मांगों के समर्थन में डटे किसानों को कितना वक्त अभी और गुजारना पड़ेगा, इसका पता नहीं है, लेकिन आंदोलन से कई बच्चों को पढ़ाई का मौका मिला है। पिछले कई महीने से बच्चों को स्कूल जाने का मौका नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी, लेकिन इस पहल से उन्हें काफी फायदा मिल रहा है।

बॉर्डरों पर सामुदायिक रसोई (लंगर), पुस्तकालय, चिकित्सा सेवा के साथ-साथ अस्थायी स्कूल में संस्था ‘सेवा’ की अहम भूमिका है। एक स्वयंसेवक सतनाम सिंह ने कहा कि लंगर के दौरान आसपास की झुग्गियों से पहुंचने वाले बच्चों को देखकर लगा कि क्यों न उनकी मदद की जाए। भोजन साथ उन्हें पढ़ना, लिखना और बोलना भी सिखाया जा रहा है। 
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इस मुहिम में पीएचडी करने वाले शिक्षक भी हैं। रोजाना अलग-अलग उम्र के बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं। पहले दिन उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए जूस, जलपान दिया गया। एक के बाद एक बच्चों की संख्या बढ़ने लगी और अब रोजाना 50-60 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्हें कक्षा के मुताबिक शिक्षक उन्हें पढ़ा रहे हैं, ताकि आंदोलन के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों से बच्चों के बौद्धिक विकास में योगदान किया जा सके।

दोनों बॉर्डर पर इस तरह की सुविधा है, जहां बच्चे हिंदी बोलते हैं। उनकी सुविधा और स्तर के मुताबिक किताबें भी मुहैया कराई गईं। सतनाम सिंह ने कहा कि शाम को होने वाले ‘सांझी साथ’ कार्यक्रम में भी बच्चे और आसपास के ग्रामीण पहुंचकर लाभप्रद बातें सुनते हैं। इस मंच पर सभी किसानों को बोलने का मौका नहीं मिलता है। कृषि बिलों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की तरफ से मिलने वाले ज्ञान से बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

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