भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक की ओर से जारी बयान में कहा कि मृतक किसान कश्मीर सिंह के सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘मैं सेवादार गुरू घर का जिला चमोली गुरुद्वारा झूपसागर साहिब पीपल कोटी हेमकुंड साहिब यात्रा समय लंगर की सेवा निभाता हूं। किसान दिल्ली आए हैं, जो सरकार ने किसानों के प्रति तीन कानून उलट बनाए हैं वह किसानों के हित में नहीं है। यह कानून भारत के सारे किसानों को माफिक नहीं है। किसान इन कानून को वापस करना चाह रहे हैं। सरकार वापस नहीं ले रही है। इसमें पंजाब के 40 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है।
यूपी और उत्तराखंड से एक भी किसान ने अपनी शरीर के प्राण नहीं दिए। मैंने भी इस बात पर विचार किया कि यूपी व उत्तराखंड से एक भी किसान ने अपना शरीर तीन कानून वापस करने को नहीं लगाया है। सो दास अपने शरीर के जीवन को तीनों कानून के विरोध में अपने आहुति दे रहा हूं। मेरे शरीर को मेरे घर पर न ले जाया जाए। जहां संगत चाहे वहां ले जाए और मेरे पोते ही देह को आग दे। इसमें मेरे बेटे, पोते या परिवार का कोई दोष नहीं है। इसके लिए कोई सलाह नहीं है। मेरे परिवार से कोई कार्रवाई और पूछताछ भी न की जाए।
भाकियू टिकैत संगठन के बिलासपुर के अध्यक्ष मनजीत सिंह ने बताया कि कश्मीर सिंह पिछले करीब 25 दिनों से यूपी गेट पर लगने वाले लंगर में सेवा कर रहे थे। खाना पीना, कपड़ा, रजाई गद्दे समेत अन्य सामान की व्यवस्था भी संभाल रखी थी। उनका बेटा लखविंदर सिंह लाडी 31 दिसंबर की रात को ही रामपुर रवाना हुआ था। किसान की मौत के बाद से पूरे आंदोलन में शोक की लहर है।
फोरेंसिक ने जुटाए साक्ष्य, मोबाइल टॉयलेट को कब्जे में लिया
पुलिस अधिकारियों ने फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। टीम ने साक्ष्य एकत्र किए। इसके बाद मोबाइल टॉयलेट को कौशांबी पुलिस ने कब्जे में ले लिया। मोबाइल टॉयलेट को यूपी गेट से पुलिस ने हटवा दिया है।
यूपी गेट पर लगे मोबाइल टॉयलेट में बुजुर्ग किसान का शव फंदे से लटका मिला था। मौके से सुसाइड नोट मिला है। सीओ फर्स्ट को किसान के शव के साथ रामपुर भेजा गया। रामपुर के एसपी से वार्ता की गई। रामपुर में ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी, गाजियाबाद