फरीदाबाद। आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस है। हेपेटाइटिस एक लीवर से जुड़ी से समस्या है। यह एक जानलेवा बीमारी है, जिसके प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। इसी का ही कारण है कि लोग पीड़ित होते हुए भी इससे अनजान हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि औसतन एक अस्पताल में इस बीमारी से संबंधित 100 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से ज्यादातर को इसका पता अस्पताल पहुंचने के बाद चलता है। दूषित चीजें खाने और रक्त विकार के कारण यह बीमारी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीज दूसरी समस्याओं जैसे पीलिया, खून की उल्टी, खाना पचने में समस्या के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। जिसका कारण बाद में हेपेटाइटिस ही मिलता है। रक्तदान करने वाले लोगों को इन बीमारियों के बारे में निशुल्क ही पता चल जाता है चूंकि ब्लड बैंक आमतौर पर होने वाली सभी बीमारियों की जांच डोनर के रक्त सैंपल में करते हैं। ऐसे में रक्तदान की आदत लोगों को स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है। हेपेटाइटिस के पांच प्रकार ए, बी, सी, डी और ई हैं। इनमें से बी और सी घातक हैं। जो रक्त विकार के कारण होते हैं।
हेपेटाइटिस-बी से वर्तमान में लगभग 3 फीसदी लोग संक्रमित हैं। वहीं 95 फीसदी को पीड़ित होते हुए भी इसकी जानकारी नहीं होती। यह बीमारी कई वर्षों तक शरीर में बनी रहती है। अंत में यह लिवर सिरोसिस या कैंसर का कारण बन सकती है। ज्यादातर सामान्य स्वास्थ्य जाँच, पीलिया लिवर की गड़बड़ी या लिवर कैंसर के टेस्ट में इसका पता चलता है। - डॉ. भास्कर नंदी, वरिष्ठ पेट रोग एवं लिवर रोग विशेषज्ञ, सर्वोदय अस्पताल
पलवल-कोसी-होड़ल क्षेत्र में ज्यादातर घरों में हेपेटाइटिस संक्रमितों की पॉकिट हैं। इनके इलाज के लिए अस्पताल नि:शुल्क जांच कैंप आयोजित करता है। औसतन एक माह में ओपीडी में भी 100 मरीज हेपेटाइटिस संक्रमित पहुंच रहे हैं। - डॉ. राम चंद्र सोनी, पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ, एशियन अस्पताल