स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा गुप्ता ने बताया कि बदलती जीवनशैली, तनाव और पोषण की कमी थायराइड बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार और सक्रिय दिनचर्या अपनाने से जोखिम कम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वायरल संक्रमण, लंबे समय तक तनाव, प्रसव के बाद शरीर में बदलाव, आयोडीन की कमी तथा हार्मोनल असंतुलन थायराइड के प्रमुख कारण हैं। इससे गर्दन में सूजन, दर्द, सांस लेने में दिक्कत और प्रजनन चक्र पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने जागरूकता और समय पर जांच को जरूरी बताते हुए लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की है।