शीतलहर का सितम लोगों पर कहर बनकर टूट रहा है। इसके कारण ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति उत्पन्न हो रही है। बढ़ती ठंड में रक्तचाप बढ़ने की सबसे बड़ी समस्या सामने आई है, जिस कारण बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं में भी समस्या दिख रही है। वहीं शहर में दो सरकारी अस्पताल नागरिक अस्पताल बीके, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सहित करीब 12 निजी अस्पताल हैं। पिछले 10 दिनों से स्मार्ट सिटी में तापमान कड़ाके की ठंड से लोग बेहाल हैं। न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री कम और अधिकतम तापमान सामान्य से आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है। रविवार को न्यूनतम तापमान आठ और अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि इस मौसम में रक्त गाढ़ा हो जाता है और उसमें लचीलापन बढ़ जाता है, रक्त की पतली नलिकाएं संकरी हो जाती हैं, जिससे रक्त का दबाव बढ़ जाता है। अधिक ठंड पड़ने या ठंडे मौसम में अधिक समय तक रहने पर खासकर उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है। इसके अलावा ठंड में लोग कम पानी पीते हैं जिसके कारण रक्त गाढ़ा हो जाता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने बताया कि ठंड में लोगों की फिजिकल एक्सरसाइज कम हो जाती है। घरों में तला भुना खाना अधिक बनता है। ठंड में इस तरह का भोजन ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल के मरीजों में ब्रेक स्ट्रोक और पैरालाइसिस के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
डॉक्टरों से बातचीत
रोजाना पहुंच रहे तीन से चार मरीज
15 दिन पहले तक अस्पताल की इमरजेंसी में ब्रेन स्ट्रोक और पैरालाइसिस के रोजाना एक-दो मरीज आते हैं। अब रोजाना तीन से चार मरीज भर्ती हो रहे हैं। जिनमें 80 फीसदी मरीज मस्तिष्क की धमनियों में खून के थक्के और 20 फीसदी मरीज ब्रेन हेमरेज के शामिल हैं। - डॉ. राहुल कुमार, न्यूरोलॉजिस्ट, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
ठंड में नसें सिकुड़ने और रक्त गाड़ा होने के कारण यह स्ट्रोक
जिन लोगों को बीपी और कॉलेस्ट्रॉल की शिकायत रहती है। उन्हें ठंड में नसें सिकुड़ जाने और रक्त गाड़ा होने के कारण यह स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। अस्पताल में रोजाना तीन से चार मरीज ब्रेक स्ट्रोक और पैरालाइसिस के इलाज पहुंच रहे हैं। नई तकनीक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी से मरीज का 24 घंटे में भी इलाज संभव है। - डॉ. रोहित गुप्ता, न्यूरोलॉजिस्ट, एकॉर्ड अस्पताल
पिछले 15 दिनों 10 मरीजों का इलाज किया
सर्दी में नसें सिकुड जाती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे दिमाग तक रक्त संचार ठीक से नहीं होता है और व्यक्ति को पैरालाइसिस या स्ट्रोक हो जाता है। जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल समस्या रहती है, धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन करते हैं। उन्हें खतरा अधिक रहता है। - डॉ. कमल वर्मा, एस्कॉर्ट फोर्टिस अस्पताल
ब्रेन स्ट्रोक होने पर मरीज की जान बचाने के लिए पहला घंटा बहुत अहम होता है। इसलिए इसे गोल्डन टाइम माना जाता है। इस एक घंटे के अंदर उच्च प्रशिक्षित एवं अनुभवी न्यूरो सर्जन की देखरेख में इलाज किये जाने पर मरीज को गंभीर स्थिति में जाने से बचाया जा सकता है। देर करने से मरीज की जान को जोखिम बढ़ सकता है।
तुरंत इलाज करना जरूरी
बीमारी का पता करने के लिए सीटी स्कैन, एमआरआई और दिमाग की नसों की एंजियोग्राफी आदि जांचे की जाती हैं। बीमारी का पता चलने के बाद तुरंत इलाज शुरू करना जरूरी होता है। -डॉ. सुषमा शर्मा, मेट्रो अस्पताल