18 वर्ष तक के मूक-बधिर बच्चों को मिलेगी 12वीं तक शिक्षा, काउंसलिंग के साथ आवासीय और खानपान की सुविधा देने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में मूक-बधिर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जल्द ही विशेष सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद जगी है। हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर पर्सन स्पीच एंड हियरिंग सेंटर की ओर से प्रदेश के हर जिले में श्रवण एवं वाणी निशक्तजन कल्याण केंद्र खोलने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा गया है। योजना के तहत फरीदाबाद में भी ऐसा केंद्र शुरू किए जाने की संभावना है। इन केंद्रों में 18 वर्ष तक की उम्र के मूक-बधिर बच्चों को शिक्षा, काउंसलिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।
प्रस्ताव के अनुसार केंद्रों में बच्चों की मानसिक स्थिति और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग की जाएगी। उन्हें 12वीं कक्षा तक पढ़ाई कराने के साथ आवासीय और खानपान की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, यदि अभिभावक बच्चे को कक्षा में पढ़ाई के बाद घर ले जाना चाहेंगे तो उन्हें इसकी अनुमति होगी। इससे ऐसे बच्चों को शिक्षा के साथ परिवार का सहयोग भी मिलता रहेगा।
पुराने रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश में करीब 1,15,527 मूक-बधिर लोग हैं। वर्तमान में इनके कल्याण और शिक्षा के लिए गुरुग्राम, नगीना, सोनीपत, करनाल, रायपुर रानी, सिरसा, हिसार और पंचकूला में केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में करीब 1100 मूक-बधिर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा के साथ इन केंद्रों में बच्चों के व्यक्तित्व विकास और प्रतिभा को निखारने के लिए समय-समय पर विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं।
स्थानीय बच्चों को मिलेगा लाभ
फरीदाबाद में श्रवण एवं वाणी निशक्तजन कल्याण केंद्र शुरू होने से जिले के मूक-बधिर बच्चों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में ऐसे बच्चों को विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए अन्य जिलों का रुख करना पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर केंद्र शुरू होने से बच्चों को शिक्षा और काउंसलिंग के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही आवासीय सुविधा मिलने से दूसरे स्थानों से आने वाले बच्चों को भी लाभ मिल सकेगा।
योग्यता के अनुसार रोजगार दिलाने पर जोर
हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर पर्सन स्पीच एंड हियरिंग सेंटर के महासचिव कृष्ण कुमार चोपड़ा ने बताया कि सोसायटी का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक मूक-बधिर व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है। बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण देने के साथ उनकी योग्यता के अनुसार विभिन्न संस्थानों में रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जाएंगे। प्रदेश के प्रत्येक जिले में केंद्र खोलने का प्रस्ताव इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।