कचरा प्रबंधन की बड़ी पहल, मुजेरी, प्रतापगढ़ और सोतई में लगेंगे तीन आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट
प्रदूषण कम होने के साथ स्वच्छता को लगेंगे पंख
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम ने शहर की बढ़ती कचरा समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुजेरी, प्रतापगढ़ और सोतई में तीन बड़े ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण (सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग) प्लांट स्थापित करने की योजना शुरू की है। इनकी कुल क्षमता 1350 टन प्रतिदिन होगी।
मुजेरी में 150 टन तथा प्रतापगढ़ और सोतई में 600-600 टन क्षमता के प्लांट लगाए जाएंगे। इन परियोजनाओं के तहत कचरे से कंपोस्ट खाद, आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री तैयार की जाएगी। इससे बंधवाड़ी डंपिंग साइटों पर फरीदाबाद के कचरे का दबाव कम होने के साथ इलाके में प्रदूषण घटेगा और शहर को स्वच्छ व टिकाऊ कचरा प्रबंधन प्रणाली मिलेगी।एनसीआर के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल फरीदाबाद अब कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। वर्षों से बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार के कारण ठोस कचरे के निपटान की चुनौती से जूझ रहे शहर के लिए नगर निगम ने तीन बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की है। नगर निगम के अनुसार तीनों परियोजनाओं की कुल क्षमता 1350 टन प्रतिदिन होगी जो फरीदाबाद की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। फिलहाल फरीदाबाद से रोजाना करीब 1 हजार टन कचरा निकलता है अब निगम के पास रोजाना 350 टन अतिरिक्त कचरा निस्तारण की क्षमता होगी जो भविष्य को देखते हुए तैयार की गई है।
फरीदाबाद हरियाणा का सबसे बड़ा औद्योगिक जिला माना जाता है। शहर की आबादी 20 लाख के करीब पहुंच चुकी है और लगातार नए सेक्टर, रिहायशी कॉलोनियां तथा औद्योगिक इकाइयां विकसित हो रही हैं। इसके साथ प्रतिदिन निकलने वाले घरेलू, व्यावसायिक और संस्थागत कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। अब तक बड़ी मात्रा में कचरा बंधवाड़ी डंपिंग साइट तक पहुंचाया जाता रहा है जिससे जमीन, भूजल और वातावरण पर दबाव बढ़ा है। नगर निगम की नई योजना का उद्देश्य कचरे को समस्या नहीं बल्कि संसाधन में बदलना है।
कचरे से बनेगी खाद, ईंधन और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री
इन परियोजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहां केवल कचरा एकत्र नहीं किया जाएगा बल्कि उसका वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाएगा। एजेंसियों को कचरे की छंटाई कर उससे विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने होंगे। गीले कचरे से जैविक कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी, जिसका उपयोग खेती, बागवानी और हरित क्षेत्रों के विकास में किया जा सकेगा। सूखे और ज्वलनशील कचरे से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल सीमेंट उद्योग और अन्य औद्योगिक इकाइयों में कोयले के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। प्लास्टिक, धातु, कांच और कागज जैसी सामग्री को अलग कर पुनर्चक्रण उद्योगों को भेजा जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी, कोयले की खपत कम होगी और नगर निगम को भी कचरा निस्तारण पर होने वाले खर्च में कमी आएगी।
जीरो वेस्ट की दिशा में बड़ा कदम
नगर निगम ने परियोजनाओं के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किया है कि आने वाले कचरे का 100 प्रतिशत प्रसंस्करण किया जाए। केवल 10 प्रतिशत तक ऐसा अवशिष्ट या इनर्ट पदार्थ, जिसका कोई उपयोग संभव नहीं है उसे ही वैज्ञानिक लैंडफिल में भेजने की अनुमति होगी। इस व्यवस्था से डंपिंग ग्राउंड पर कचरे के पहाड़ बनने की समस्या कम होगी। साथ ही खुले में कचरा जलाने और उससे होने वाले वायु प्रदूषण पर भी अंकुश लग सकेगा। पूरी परियोजना को तकनीक आधारित बनाया गया है। कचरा ढोने वाले प्रत्येक वाहन में जीपीएस और आरएफआईडी सिस्टम लगाया जाएगा ताकि उसकी आवाजाही की निगरानी की जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कचरा निर्धारित स्थल तक ही पहुंचे। प्रोसेसिंग प्लांटों पर आईपी आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और पूरी गतिविधि की रीयल टाइम निगरानी होगी। वेब-लिंक्ड वे-ब्रिज के माध्यम से आने वाले कचरे का वजन दर्ज किया जाएगा तथा एजेंसियों को प्रतिदिन का डेटा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
पीपीपी मॉडल पर संचालित होंगी परियोजनाएं
तीनों परियोजनाएं सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जाएंगी। चयनित एजेंसी डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। परियोजना की प्रारंभिक अवधि दो वर्ष होगी, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर अगले दो वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। मुजेरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 9 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है जबकि प्रतापगढ़ और सोतई में स्थापित होने वाले बड़े प्लांटों पर करीब 41 करोड़ का निवेश होने की संभावना है।
स्वच्छता रैंकिंग और पर्यावरण को मिलेगा फायदा
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने के बाद फरीदाबाद की स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिखाई देगा। डंपिंग साइटों पर दबाव घटेगा, दुर्गंध और प्रदूषण कम होगा तथा शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग में भी सुधार आने की संभावना है। साथ ही खाद और आरडीएफ जैसे उत्पादों के निर्माण से कचरा प्रबंधन व्यवस्था आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी। यह मॉडल भविष्य में एनसीआर के अन्य शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
परियोजना की प्रमुख बातें
स्थान: मुजेरी, प्रतापगढ़ और सोतई।
कुल क्षमता: 1350 टन प्रतिदिन।
मुजेरी प्लांट: 150 टीपीडी।
प्रतापगढ़ प्लांट: 600 टीपीडी।
सोतई प्लांट: 600 टीपीडी।
मुख्य उत्पाद: कंपोस्ट खाद, आरडीएफ, प्लास्टिक, धातु, कागज व अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री।
वर्जन
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए बड़े स्तर पर आधुनिक सफाई का काम चल रहा है। अब कचरा निस्तारण भी किया जाएगा। इससे शहर में सफाई के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी। -धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त