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Faridabad News: निजी अस्पतालों में होगा गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड, सरकार करेगी भुगतान

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स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों से समझौता करने का लिया फैसला
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए परेशान होना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब जिला स्वास्थ्य विभाग ने जल्द ही निजी अस्पतालों के साथ समझौता करने का फैसला लिया है। इससे गर्भवतियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा और वे निजी अस्पतालों में जाकर अल्ट्रासाउंड करा सकेंगी। महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवतियों को पर्ची बनाकर देंगी। वह पर्ची दिखाने पर संबंधित अस्पताल अल्ट्रासाउंड करेगा। इसके बाद उस पर्ची के आधार पर ही सरकार निजी अस्पताल को भुगतान करेगी।

बीके अस्पताल में लंबे समय से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। डॉ. सुशील अहलावत के पदोन्नत होने के बाद से ही बीके अस्पताल के मरीज रेडियोलॉजिस्ट की कमी से जूझ रहा है। बीके अस्पताल के निवेदन पर वह सप्ताह में तीन दिन दो घंटे के लिए अल्ट्रासाउंड करने के लिए आते हैं। दो घंटे के समय में सभी गर्भवतियों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। ऐसे में गर्भवतियों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ता है।
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नहीं मिल रहा मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना का लाभ


शहर में गर्भवती महिलाओं को रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में डॉ. सुशील अहलावत रोजाना 20 से 25 गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड करते थे। अब सप्ताह में तीन दिन अल्ट्रासाउंड होने से गर्भवतियों की संख्या दोगुनी हो जाती है। दो घंटे के समय में सभी गर्भवतियों का नंबर नहीं आ पाता है। ऐसे में महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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गर्भवती महिलाओं की परेशानी को देखते हुए निजी अस्पतालों के साथ समझौता करने का फैसला लिया गया है। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को बाहर निजी लैब में महंगे अल्ट्रासाउंड करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। - डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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