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रिटायर्ड कर्मचारी से 22 लाख ठगने वाले दो गिरफ्तार

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फरीदाबाद। जीवन बीमा पॉलिसी में बेहतर मुनाफा दिलाने के नाम पर फरीदाबाद में रहने वाले एक रिटायर्ड कर्मचारी से 22 लाख की ठगी करने वाले दो आरोपियों को साइबर अपराध शाखा टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी दिल्ली के मोतीनगर इलाके में फर्जी कॉल सेंटर चलाते थे। शनिवार की रात गिरफ्तार किए गए आरोपियों को पुलिस ने रिमांड पर लिया था। इस दौरान आरोपियों ने कई राज उगले हैं। आरोपियों से 14 लाख रुपये और ठगी में प्रयोग किए गए 21 सिम बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुज्जफरपुर बिहार निवासी इकबाल और उत्तरप्रदेश के मछलीशहर निवासी विनोद कुमार के रूप में हुई है।
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बुधवार को मामले का खुलासा करते हुए पुलिस उपायुक्त मुख्यालय डॉ. अर्पित जैन ने बताया कि खुद को मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कर्मी बताकर ठगों ने फरीदाबाद के यशपाल को झूठे प्रलोभन देकर फंसाया था। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय से रिटायर्ड कर्मचारी यशपाल की पालिसी वर्ष 2018 में पूरी हो गई थीं। इनको दोबारा चालू कराने और मोटे ब्याज का लालच देकर ठगों ने कई बैंकों के 6 खातों में 22 लाख 63 हजार रुपये ले लिए। जब आरोपियों द्वारा बताई गई समय सीमा खत्म हो गई, तो पीड़ित ने अपने पैसों को लौटाने के लिए कहा। आरोपी लॉकडाउन का बहाना बनाकर टालते रहे। बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया। जब पीड़ित ने परेशान होकर मैक्स लाइफ इंश्योरेंस पालिसी के ऑफिस में पता किया तो उन्हें अपने साथ हुई ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत थाना साइबर अपराध फरीदाबाद में की।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि साइबर अपराध पुलिस टीम ने दिल्ली के मोतीनगर इलाके में दबिश देकर दीपक और इकबाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने दिल्ली में फर्जी तरीके से कॉल सेंटर चला रखा था। दोनों दिल्ली में ही किराए पर रह रहे थे।
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रिमांड के दौरान पूछताछ में उगले राज
रिमांड के दौरान पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि फर्जी कॉल सेंटर में वह लड़कियों की भर्ती करते थे और उनसे ही फोन कराते थे। जिससे लोग सहज ही विश्वास करें। वह किसी भी फोन की एक सीरीज चिन्हित करते थे और आखिरी का नंबर बदल-बदलकर फोन करते थे। फोन उठाने वाले लोगों को कहते थे कि वह लाइफ इंश्योरेंस की शिकायत शाखा से बोल रही हैं। उनकी कोई भी पॉलिसी या किस्त टूट गई है, किस्त भरनी छोड़ दी है या फिर पूर्ण हो गई है और अब कोई समस्या आ रही है तो उसके समाधान की बात कॉलर से की जाती थी। लड़कियां लोगों को आरोपियों के नंबर दे देती थीं। आरोपी फोन कर उनकी बीमा कंपनी के बारे में पूछते और कम समय में ज्यादा फायदे का प्रलोभन देकर अपने अलग-अलग खातों में पैसा डलवा लेते थे।
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