जांच में सामने आया स्वाइन फ्लू
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दोनों को अचानक ठंड लगकर बुखार आया था। उन्होंने करीब दो दिन तक घर पर ही उपचार लिया, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सांस लेने में परेशानी होने लगी तो उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की सलाह पर स्वाइन फ्लू की जांच कराई गई, जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य विभाग रख रहा नजर
स्वास्थ्य विभाग ने दोनों मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी है। संपर्क में आने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। टीम उनसे लगातार जानकारी ले रही है और किसी तरह की तबीयत खराब होने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
निजी अस्पतालों को जारी किए निर्देश
उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामभगत ने बताया कि स्वाइन फ्लू वायरल संक्रमण है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। इसके चलते विभाग ने जिले के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अस्पतालों को स्वाइन फ्लू के संदिग्ध और पुष्ट मामलों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू को ए, बी और सी तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। सी श्रेणी के मरीजों को विशेष उपचार की आवश्यकता होती है, जबकि ए और बी श्रेणी के मामले सामान्य फ्लू की तरह होते हैं।स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।