खेल प्रशिक्षकों ने कहा, खिलाड़ियों को बाहर ले जाते समय उनके पास नहीं होते पहचान पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-12 स्थित खेल परिसर में शनिवार को खेल प्रशिक्षकों के लिए संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के करीब 20 खेल प्रशिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रशिक्षकों ने खेल, खिलाड़ियों और अपनी नौकरियों व सुविधाओं से जुड़ी तमाम गंभीर समस्याओं को खुलकर सामने रखा।
चर्चा के दौरान खेल प्रशिक्षकों ने कहा कि औद्योगिक नगरी और बड़े खिलाड़ियों के गढ़ माने जाने वाले जिले में इस समय फुटबॉल की कोई आधिकारिक एसोसिएशन ही नहीं है। प्रशिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब जिले में खेल की देखरेख करने वाली कोई संस्था या एसोसिएशन ही नहीं होगी, तो जमीनी स्तर से नए खिलाड़ी कैसे आगे निकलेंगे और उन्हें सही मंच कैसे मिलेगा।
निजी प्रशिक्षकों ने सरकार के सामने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें प्रशासन की तरफ से किसी भी प्रकार की वित्तीय या बुनियादी सहायता नहीं मिलती है। सबसे बड़ी दिक्कत तब आती है जब वे खिलाड़ियों को लेकर किसी बड़े टूर्नामेंट या टूर पर बाहर जाते हैं। ऐसे समय में उनके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए कोई आधिकारिक पहचान पत्र तक नहीं होता है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बातचीत-
किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन में कोच का अहम योगदान होता है। इसके बाद भी सरकार उनके लिए कुछ नहीं करती।- आनंद
जब कोई टीम बाहर खेलने जाती है तो कोच के पास कोई आधिकारिक पहचान पत्र नहीं होता है, ऐसे में परेशानी होती है। - अशोक कुमार, कोच
जिले में फुटबॉल की नर्सरी तो है, लेकिन सामान ही नहीं है। ऐसे में खिलाड़ी कैसे तैयारी करेंगे।- दीनानाथ
तिगांव में कबड्डी की सबसे बड़ी नर्सरी है, लेकिन उसकी हालत खराब है। प्रशासन को ग्राउंड मैन भी उपलब्ध कराने चाहिए।- प्रवीण