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Faridabad News: भ्रष्टाचार के मामले में नगर निगम के तत्कालीन संयुक्त निदेशक को मिली अग्रिम जमानत

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बगैर काम किए फर्जी बिलों से ठेकेदार को 4.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया
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एसीबी ने 19 अप्रैल 2022 को दर्ज की थी एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम में बगैर काम हुए ठेकेदार को 4.90 करोड़ रुपये के भुगतान के फर्जीवाड़े व भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन संयुक्त निदेशक (ऑडिट) दीपक थापर को जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिली है। इनके अधिवक्ता की ओर से याचिका दायर कर दलील दी गई कि इन्हें केस में गलत फंसाया गया है। ये जांच में शामिल हो चुके हैं और सप्लीमेंट्री चालान भी 10 जून 2025 को पेश हो चुका है। दीपक को साल 2022 को एसीबी की एफआईआर नवंबर 11 में गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य मामलों में भी जांच में शामिल किया जा चुका है।
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि आरोपी ने गंभीर और संगीन अपराध किया है। सभी पक्षों को सुनकर जिला अदालत ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए दीपक थापर को अग्रिम जमानत दे दी है। साथ ही अदालत ने दीपक थापर को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने और सात दिन के भीतर नियमित जमानत प्राप्त करने के भी निर्देश दिए हैं।
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एसीबी फरीदाबाद थाने में ये एफआईआर साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी व भ्रष्टाचार की धाराओं में 19 अप्रैल 2022 को दर्ज हुई थी। मामले में एसीबी के डिप्टी एसपी कैलाश चंद की लिखित शिकायत पर यह एफआईआर हुई थी। मामले में आरोप था कि फरीदाबाद नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर ठेकेदार सतबीर के साथ मिलकर बल्लभगढ़ के वार्ड नंबर 34 से 40 में विकास कार्यों के नाम पर 4.90 करोड़ का भुगतान अलग-अलग फर्मों के जरिये कर दिया।
आरोपी कर्मचारियों में दीपक कुमार जूनियर इंजीनियर, रमन शर्मा कार्यकारी अभियंता, दौलत राम भास्कर मुख्य अभियंता, पंकज क्लर्क लेखा शाखा, प्रदीप क्लर्क लेखा शाखा और अन्य कर्मचारियों व ठेकेदार सतबीर सिंह पर शुरू में आरोप लगा। बाद में जांच में कई अन्य नाम सामने आए। आरोपियों ने इन सात वार्डों की विभिन्न गलियों में इंटरलॉकिंग पेवर टाइलें प्रदान करने और बिछाने, पत्थर धातु की आपूर्ति, पुलियों का निर्माण, नालियों की मरम्मत के कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया।
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संयुक्त निदेशक (ऑडिट) दीपक थापर साल 2018 से 2020 की अवधि के बीच नगर निगम में कार्यरत थे। इस अवधि के दौरान पद पर रहते हुए उन्होंने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर साजिश के तहत फर्जीवाड़े में भूमिका निभाई। इन्होंने ठेकेदार के 112 बिलों के पूर्व-ऑडिट/पास करने के मामले में भूमिका निभाई।
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