पेट्रोकेमिकल महंगा होने से जूते के सोल बनाने की लागत काफी बढ़ गई
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव का सीधा असर अब फरीदाबाद के स्थानीय व्यापार पर दिखने लगा है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोकेमिकल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसने जिले के जूता-चप्पल (फुटवियर) उद्योग की कमर तोड़ दी है। कच्चे माल के दाम में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी होने से जूता निर्माताओं के सामने संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोकेमिकल महंगा होने से जूते के सोल बनाने की लागत काफी बढ़ गई है। बाजार में मिलने वाले विभिन्न क्वालिटी के सोल के दामों में भारी उछाल आया है। जो सोल पहले हम 80 रुपये का खरीदते थे, वह अब 100 रुपये का मिल रहा है। वहीं इसी प्रकार से 120 वाला सोल 140 से 150 और बेहतर क्वालिटी के सोल जो 200 रुपये प्रति पीस मिलते थे, वह अब 250 और 250 वाले 300 में मिल रहे हैं। सोल ही नहीं, जूतों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले गत्ते के डिब्बों के दाम भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। जो गत्ता पहले 35 से 45 रुपये प्रति किलो मिलता था, वह अब 55 से 60 रुपये किलोग्राम तक पहुंच चुका है।
व्यापारियों का कहना है कि इसके अलावा न्यूनतम वेतन एक दम से बढ़ना और निर्यात ठप होने सहित जूता उद्योग कई समस्याओं से जूझ रहा है।
200 से अधिक कंपनियों पर संकट
बता दें कि फरीदाबाद के सेक्टर-4, सेक्टर-6, सेक्टर-24, सेक्टर-25, एनआईटी और बल्लभगढ़ इलाकों में जूते-चप्पल बनाने की लगभग 150 से 200 छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित होती हैं। इन कंपनियों में 30 से लेकर 400 तक कर्मचारी काम करते हैं। यदि कच्चे माल की कीमतें जल्द काबू में नहीं आईं, तो कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप होने और कर्मचारियों की छंटनी की नौबत आ सकती है।