-सड़क के निर्माण से 50 किमी का सफर घट कर रह जाएगा मात्र 13 किलोमीटर
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मुख्यमंत्री की प्रस्तावित रैली से ठीक पहले बहुप्रतीक्षित नगीना–तिजारा सड़क परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। करीब पांच वर्षों से ठप पड़ी इस महत्वाकांक्षी सड़क के लिए 26 लाख रुपये की लागत से नए सिरे से सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है। हरियाणा और राजस्थान को जोड़ने वाली इस सड़क को मेवात क्षेत्र के विकास की धुरी माना जा रहा है।
दावा है कि इस सड़क के बनने से 50 किलोमीटर का सफर महज 10 मिनट में पूरा हो सकेगा। क्योंकि अरावली पर्वत कटने के बाद 50 किलोमीटर का रास्ता महज 13 किलोमीटर का रह जाएगा। जिससे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदल सकती है। यह सड़क हरियाणा के नगीना को राजस्थान के तिजारा से जोड़ेगी। इस सड़क को बनाने के लिए वर्ष 2016-17 में 21 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली। साल 2018 में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगस्त में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। लेकिन फरवरी 2020 में कोरोना महामारी के चलते काम को बंद करना पड़ा, जिसके बाद फिर यह काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया। हालांकि पिछले 5 वर्षों में 21 से अधिक बार टेंडर जारी हुए, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। काम शुरू कराने के लिए जुलाई 2024 में दोबारा टेंडर जारी किया गया, फिर भी कानूनी अड़चनों में मामला फंस कर रह गया।
- निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती: अरावली की दीवार
यह मार्ग हरियाणा में लगभग 4 किलोमीटर और राजस्थान में 9-10 किलोमीटर तक अरावली पर्वतमाला को काटकर बनाया जाना है। पथरीले और पहाड़ी क्षेत्र के कारण निर्माण तकनीकी रूप से जटिल है। पर्यावरणीय मंजूरियों और अतिरिक्त बजट की जरूरत ने भी देरी को बढ़ाया।
- पांच साल में 21 टेंडर, फिर भी अधूरा सपना
परियोजना को लेकर प्रशासनिक लेटलतीफी और ठेकेदारों की अनदेखी बड़ा कारण मानी जा रही है। बार-बार टेंडर जारी होने के बावजूद कोई भी कंपनी कार्य को अंतिम रूप तक नहीं पहुंचा सकी। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ी है।
- क्यों खास है यह सड़क?
इस सड़क से हरियाणा और राजस्थान के मेवात क्षेत्र को सीधा जोड़ा जा सकता है। जिले के लोगों की राजस्थान के तिजारा क्षेत्र में अनेक रिश्तेदारियां, काम-धंधे, औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी व चौपानकी से अनेक प्रकार के रोजगार लोगों द्वारा किए जाते है। अभी लोगों को करीब 50 किलोमीटर का चक्कर लगाकर यहां जाना पड़ता है। जिले के लोगों की यह काफी पुरानी और महत्वपूर्ण मांग है। इस सड़क के निर्माण के बाद 50 किलोमीटर का सफर घटकर मात्र 13 किलोमीटर रह जाएगा, जिससे लोगों को काफी सहूलिय होगी। सड़क बनने से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ जल्दी लिया जा सकता है। इसके अलावा सीमावर्ती गांवों के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
- जनता की उम्मीदें बनाम राजनीतिक घोषणाएं
मुख्यमंत्री की रैली से पहले सर्वे शुरू होने को लोग सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, लेकिन वे अब केवल घोषणाओं पर भरोसा नहीं करना चाहते। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि इस बार निर्माण कार्य वास्तव में शुरू होकर पूरा हो जाता है, तो यह सड़क मेवात के विकास की नई कहानी लिख सकती है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह सर्वे जमीनी निर्माण में बदल पाएगा या फिर यह परियोजना एक बार फिर कागजों तक सीमित रह जाएगी।