15 दिन की दी है मोहलत, यदि खुद निर्माण नहीं हटाया गया तो विभाग कार्रवाई करेगा।
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक परसोन मंदिर और वन विभाग के बीच अवैध निर्माण को लेकर विवाद बढ़ने लगा है। वन विभाग ने मंदिर परिसर में बनी सीमेंटेड यज्ञशाला और आसपास के अन्य निर्माणों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने का नोटिस जारी कर दिया है। विभाग का कहना है कि यह पूरा इलाका पीएलपीए (पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम) के दायरे में आता है जहां बिना अनुमति के किसी भी तरह का पक्का निर्माण करना कानूनन गलत है। वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए मंदिर प्रबंधन को 15 दिन की मोहलत दी है और चेतावनी दी है कि यदि खुद निर्माण नहीं हटाया गया तो विभाग कार्रवाई करेगा।
वन विभाग के नोटिस में साफ कहा गया है कि 18 अगस्त 1992 के विशेष आदेशों के तहत यह जमीन संरक्षित श्रेणी में आती है। नियमों के मुताबिक 25 अक्तूबर 1980 के बाद बिना केंद्र सरकार की मंजूरी के वन क्षेत्र में किए गए सभी निर्माण गैर-कानूनी हैं। जिला वन अधिकारी झलकार ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के निर्देशों के तहत इन जमीनों पर गैर-वानिकी गतिविधियों को रोकना और वहां दोबारा जंगल विकसित करना अनिवार्य है। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि सरकारी कार्रवाई के दौरान किसी सामग्री या उपकरण का नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी विभाग की नहीं होगी।
दूसरी ओर मंदिर प्रबंधन ने इस कार्रवाई पर कड़ा रोष जताया है। प्रबंधन का दावा है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना और लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है इसलिए वे किसी भी कीमत पर यज्ञशाला को टूटने नहीं देंगे। मंदिर के पास नोटिस चस्पा होने के बाद से ही श्रद्धालुओं में नाराजगी है। अब मंदिर से जुड़े लोग लामबंद हो रहे हैं और इस कार्रवाई को रुकवाने के लिए जल्द ही केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से मिलकर मदद की गुहार लगाएंगे। फिलहाल वन विभाग और मंदिर समर्थकों के बीच इस मुद्दे को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है।