पहली तीज बनेगी यादगार, मायके-ससुराल की परंपराओं को साथ निभाएंगी नवविवाहिताएं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सावन का महीना नवविवाहिताओं के लिए इस बार कुछ ज्यादा ही खास है। शादी के बाद पहली तीज को लेकर नई दुल्हनों में उत्साह के साथ भावनाएं भी जुड़ी हैं। मायके से मिलने वाले उपहार और स्नेह के साथ ससुराल में निभाई जाने वाली रस्में उनकी पहली तीज को यादगार बना रही हैं। किसी के लिए यह मायके की यादों को संजोने का मौका है तो किसी के लिए ससुराल की नई परंपराओं को अपनाने का।
पहली तीज को लेकर नवविवाहिताएं अपने-अपने तरीके से तैयारियां कर रही हैं। मायके में तीज से जुड़ी जिन रस्मों को बचपन से देखती आईं, अब उन्हें ससुराल में निभाने का अनुभव उनके लिए खास है। परिवार की महिलाएं भी नई दुल्हनों की पहली तीज को खास बनाने में जुटी हैं।
नई दुल्हनों के लिए तीज पर मायके से आने वाले उपहार का भी विशेष महत्व है। इसमें सिर्फ सामान नहीं, बल्कि माता-पिता और परिवार का स्नेह जुड़ा होता है। वहीं ससुराल में होने वाली रस्में उन्हें नए परिवार के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं। नई दुल्हनों के लिए पहली तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि शादी के बाद बदली जिंदगी में रिश्तों और परंपराओं को करीब से महसूस करने का अवसर भी है। मायके का स्नेह, ससुराल का अपनापन और तीज की रस्में मिलकर उनके पहले सावन को ऐसी याद दे रही हैं, जिसे वे लंबे समय तक संजोकर रखेंगी।
पहली तीज को लेकर बहुत उत्साहित हूं। मायके की यादें भी साथ रहेंगी।
- ममता
मायके से मिलने वाले उपहार से ज्यादा उसमें परिवार का प्यार महसूस होता है।
- पूजा
ससुराल में पहली तीज की रस्में निभाना मेरे लिए नया और खास अनुभव है।
- गीतांजलि
पहली तीज मायके और ससुराल दोनों की खुशियों को साथ लेकर आई है।
- सुमन