23 अगस्त 2024 की देर रात मकान मालकिन, उनके बेटे व अन्य के साथ कार में जा रहे आर्यन की गोली लगने से हुई थी मौत
गो तस्कर समझ की गई थी आर्यन की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। गो-तस्कर समझकर मारे गए 12वीं के छात्र आर्यन मिश्रा हत्याकांड मामले में शुक्रवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम को लेकर दोपहर बाद शुरू हुई सुनवाई में लगभग डेढ़ घंटे तक बहस चली। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से दलीलें पेश की गई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके खिलाफ एक भी ठोस सबूत नहीं है। इनको पुलिस केस से कनेक्ट ही नहीं कर पाई है। शुरू में शिकायतकर्ता ने जिन पर वारदात का आरोप लगाकर एफआईआर कराई, उनके खिलाफ पुलिस ने जांच ही नहीं की। दो बार बैलेस्टिक रिपोर्ट जांच में नेगेटिव आ चुकी है।
वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से भी दलीलें दी गई कि गो-तस्कर समझकर छात्र की हत्या कर दी गई। आरोपियों की सीडीआर, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज व बरामदगी इनके खिलाफ अहम सबूत हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला अदालत ने ऑर्डर सोमवार तक रिजर्व रख लिया।
हत्या की यह वारदात 23 अगस्त 2024 की देर रात हुई थी। फरीदाबाद से पीछा करते हुए दिल्ली-आगरा हाईवे पर पलवल एरिया में गदपुरी टोल के पास रंजिश के चलते डस्टर कार में सवार आर्यन मिश्रा के मकान मालिक की पत्नी, बेटे व अन्य परिवार पर गोलियां चलाई। गोली लगने से जख्मी 12वीं के छात्र 20 साल के आर्यन को इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान 24 अगस्त की दोपहर छात्र की मौत हो गई। कार सवार 5-6 हमलावरों ने फरीदाबाद से पीछा करते हुए गोली चलाना शुरू किया और लगभग 10 किलोमीटर तक पीड़ित पक्ष की कार का पीछा कर गदपुरी टोल पार करने के बाद गोली मारकर वे भाग गए।
केस दर्ज कर पुलिस जांच करते हुए पुलिस कथित गोरक्षक अनिल कौशिक तक पहुंची और केस का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि आर्यन की हत्या मकान मालिक के बेटे की रंजिश वाले युवकों ने नहीं बल्कि कथित गो रक्षकों ने की थी। इन कथित गो रक्षकों ने गो-तस्करों के शक में कार का पीछा करते हुए गोलियां चलाना शुरू किया। कुल 5 आरोपियों को मामले में गिरफ्तार किया गया जिनमें अनिल कौशिक, वरूण, कृष्ण, सौरभ और आदेश शामिल रहे। आर्यन मिश्रा हत्याकांड में फरीदाबाद पुलिस ने लिंचिंग की धारा में 26 नवंबर 2024 को चार्जशीट अदालत में पेश की थी। लगभग 600 पेज की चार्जशीट में पुलिस ने कुल 40 गवाह बनाए हैं। बाद में हत्याकांड में फरीदाबाद पुलिस ने अदालत से गुहार लगाकर लिंचिंग की धारा चार्जशीट से हटवा दी।