फाइल गुम होने और गलतफहमी का तर्क नहीं चला
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने 27 अप्रैल 2022 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) द्वारा दिए गए उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें एक निजी कंपनी के पक्ष में डिक्री (किसी मुकदमे के अंत में दिया गया एक औपचारिक, लिखित और अंतिम निर्णय) पारित की गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने कंपनी की याचिका स्वीकार करते हुए 28 फरवरी 2019 के विवादित बिजली बिल और उसमें जोड़े गए करीब तीन लाख 25 हजार के बकाया को लेकर राहत दी थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए निगम ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की, लेकिन यह अपील तय समय सीमा से एक वर्ष तीन माह 15 दिन बाद दाखिल की गई। जिसके चलते अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने डीएचबीवीएनएल की अपील को देरी के कारण खारिज कर दिया।
निगम ने देरी माफी के आवेदन में कहा कि फैसले की प्रति कार्यालय में गुम हो गई थी और एक अन्य मुकदमे के वापस होने की गलतफहमी के कारण अपील समय पर दाखिल नहीं हो सकी। अदालत ने पाया कि अपील की अंतिम तिथि 27 मई 2022 थी और देरी का संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने देरी माफ करने से इनकार कर अपील खारिज कर दी। अदालत के आदेश के अनुसार कंपनी का 31 केडब्ल्यू का कनेक्शन था। 12 नवंबर 2018 को 2045 केवीएएच और 13 दिसंबर 2018 को 2567 केवीएएच का बिल जारी हुआ। बाद में 15 जनवरी 2019 को 3715 केवीएएच और 22 फरवरी 2019 को 3375 केवीएएच का औसत बिल बना, जिसे जमा किया गया। कंपनी के अनुसार 28 फरवरी 2019 को करीब 56 हजार केवीएएच यूनिट दिखाते हुए भारी बिल जारी किया गया और करीब तीन लाख 25 हजार का बकाया जोड़ दिया गया।