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Faridabad News: परिजनों से खतरा न होने की पुष्टि के बाद दंपती ने वापस ली सुरक्षा याचिका

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अदालत ने सुरक्षात्मक अभिरक्षा से रिहा करने के दिए आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (अवकाशकालीन) के.पी. सिंह की अदालत ने 26 जून को नवविवाहित दंपती पलक जिंदल और अभिषेक शर्मा की सुरक्षा याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उन्हें सुरक्षात्मक अभिरक्षा (प्रोटेक्टिव कस्टडी) से रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश को दंपती के विवाह की वैधता पर किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं माना जाएगा।
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मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत दायर सुरक्षा याचिका से जुड़ा था। इस प्रावधान के तहत ऐसे बालिग दंपती, जिन्हें विवाह या संबंध के कारण जान-माल का खतरा होने की आशंका हो, अदालत से सुरक्षा और संरक्षण की मांग कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान दोनों याचिकाकर्ता अदालत में स्वयं उपस्थित हुए। मुजेसर थाना पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट पेश कर बताया कि दंपती के परिजनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित परिजनों ने विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही दंपती को किसी प्रकार की धमकी देने की बात सामने आई। इसके बाद पलक जिंदल और अभिषेक शर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि अब उन्हें किसी भी व्यक्ति से अपनी जान का खतरा नहीं है। इसलिए वे अपनी सुरक्षा याचिका वापस लेना चाहते हैं और उन्हें सुरक्षात्मक अभिरक्षा से मुक्त किया जाए। पुलिस रिपोर्ट और दोनों के बयानों पर विचार करने के बाद अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए उसका निस्तारण कर दिया। साथ ही दोनों को सुरक्षात्मक अभिरक्षा से तत्काल रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त, फरीदाबाद को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश भी दिए।
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